राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोदी कैबिनेट के मंत्री डॉ. एल मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्रीपरिषद से मुरुगन के इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है. संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत प्रक्रिया पूरी की गई है. 

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इससे पहले 13 अक्टूबर को मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच मुरुगन ने अपना इस्तीफा दिया था. तमिलनाडु से आने वाले बीजेपी के सीनियर नेता मुरुगन सरकार में केंद्रीय सचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. उन्होंने इस दौरान राज्यसभा की सदस्यता को छोड़ते हुए, पार्टी को तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर मजबूत करने का संकल्प दोहराया. 

तमिल की राजनीति अब मुरुगन का अगला पड़ाव

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मुरुगन ने अपने पत्र में कहा था कि वह अब अपना पूरा समय तमिलनाडु में बीजेपी को मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में बिताएंगे. उन्होंने अपने पत्र में पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा था कि पीएम मोदी के नेतृत्व में पांच साल तक केंद्र सरकार में काम करना, उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है. अब वह उस काम पर लौटना चाहते हैं, जिसने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरणा दी. 

उनका अगला मकसद बीजेपी को तमिलनाडु में मजबूत करना है. राज्य में 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करना उनकी प्राथमिकता है. 

मुरुगन का संघर्ष से केंद्रीय मंत्री तक का सफर?

मुरुगन ने अपने त्यागपत्र में अपने संकल्प के बारे में भी बताया था. उन्होंने जिक्र करते हुए कहा था कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते हैं. उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते थे. मवेशी चराते थे. उनका परिवार आज भी तमिलनाडु के कोनूर गांव में साधारण जीवन जी रहा है. उनके माता पिता ने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा एक दिन केंद्र सरकार में मंत्री बनेगा. मुरुगन ने अपने राजनीतिक सफर का पूरा श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व औऱ बीजेपी की उस परंपरा को दिया था, जिसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है.