कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि चर्चा के दौरान आप (कांग्रेस) कह रहे थे कि कालाधन संपत्ति, हीरे जवाहरात के रूप में है. हम भी इस बात को मानते हैं. इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि भ्रष्टाचार का प्रारंभ नकदी से होता है. आगे इसका प्रवेश प्रोपर्टी, आभूषण आदि में होता हैं. बेनामी सम्पत्ति को लेकर आने वाले दिनों में सख्त कदम उठाने का संकेत देते हुए उन्होंने सवाल किया,‘यह सदन जानना चाहता है कि यह ज्ञान कांग्रेस को कब हुआ. क्या यह ज्ञान आपको आज ही हुआ.’उन्होंने कहा कि कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ वह जो कदम उठा रहे हैं, उससे उनके उपर क्या बीतेगी, क्या जुल्म होंगे, उन्हें मालूम हैं लेकिन वह प्रण के साथ आगे बढ़ते रहेंगे. प्रधानमंत्री ने सवाल किया, आपको मालूम है कि ये ही बुराइयों के केंद्र में हैं. तो आप लोग बताइए 1988 में जब राजीव गांधी पीएम थे. नेहरूजी से ज्यादा बहुमत आपके पास था. आप ही आप थे, कोई नहीं था. 1988 में आपने बेनामी संपत्ति कानून बनाया लेकिन उसे अधिसूचित क्यों नहीं किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आपको जो ज्ञान आज हुआ है, क्या कारण था कि 26 साल तक उस कानून को अधिसूचित नहीं कया गया. उस समय अधिसूचित किया होता तो जो ज्ञान आज हुआ है, 26 साल पहले स्थिति थी. देश साफ सुथरा जल्दी हो जाता. मोदी ने कहा, आप किसी का नाम लेकर बच नहीं सकते. आपको देश को जवाब देना होगा. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने नोटबंदी से पहले बेनामी संपत्ति के खिलाफ कानून बनाया. मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि आप कितने ही बड़े क्यों नहीं हों. गरीब के हक का आपको लौटाना होगा. मैं इस रास्ते से पीछे लौटने वाला नहीं हूं. मैं गरीबों के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं, लड़ता रहूंगा. सीमापार सेना के सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा निर्णय था और सर्जिकल स्ट्राइक के कारण आपको (विपक्ष) परेशानी हो रही है. प्रधानमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइन पर सवाल उठाने को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा और कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के पहले 24 घंटे में कैसे कैसे बयान दिये गए लेकिन जब देखा कि देश का मिजाज अलग है तब भाषा बदल गई. देश के लिए गांधी परिवार के कुर्बानी देने संबंधी कांग्रेस नेता मल्लिकाजरुन खडगे की टिप्पणी पर चुटकी लेते हुए मोदी ने कहा, बहुत बड़ी कृपा की आपने देश पर. लोकतंत्र बचाया. कितने महान लोग हैं. लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भलीभांति जानता है. पूरा लोकतंत्र एक परिवार को आहूत कर दिया गया. उन्होंने कहा कि कल हमारे मल्लिकार्जुन जी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है. आप प्रधानमंत्री बन पाए. आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि 1975 का कालखंड जब देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, हिंदुस्तान को कारागार बना दिया गया था. जेपी समेत लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया था. अखबारों पर ताले लगा दिये गये थे. उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कुचलने के ढेर सारे प्रयासों के बावजूद जनशक्ति की ताकत से लोकतंत्र पुन: स्थापित हुआ. लोकतंत्र की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी इस देश का प्रधानमंत्री बन सकता है. कांग्रेस और वाम दलों ने प्रधानमंत्री के बयान पर स्पष्टीकरण की अनुमति नहीं मिलने पर असंतोष जताते हुए सदन से वाकआउट किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस का जन्म भी नहीं हुआ था तब 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा था. सबने मिलकर लड़ा था. संप्रदाय का कोई भेद नहीं था. ‘तब भी कमल था और आज भी कमल है.’उन्होंने कहा कि जब भी हमारी ओर से कोई योजना, कार्यक्रम पेश किया जाता है तब उस ओर से (कांग्रेस) कहा जाता है कि ये हमारे समय की है. अब मैं आपके ही मैदान में खेलता हूं. यह स्पष्ट रूप से दिखेगा कि कार्य संस्कृति, नीयत में बदलाव आता है तब चीजें किस प्रकार से बदलती है. सांसदों से देश में सकारात्मक माहौल बनाने में सहयोग देने की अपील करते हुए मोदी ने कहा कि कोई ऐसा सदस्य नहीं है जो हिंदुस्तान का बुरा चाहता है या आने वाले कल को बुरा देखना चाहता है. उन्होंने कहा, ‘मैं बार बार कह चुका हूं, लाल किले से बोल चुका हूं कि अब तक जितनी सरकारें आई, जितने प्रधानमंत्री आए उन सबका योगदान रहा है.’ कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन उस ओर से कभी चापेकर बंधु, सावरकर, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद का जिक्र नहीं आया, जिन्होंने कुर्बानी दी. उनके लिए तो आजादी सिर्फ एक परिवार की देन लगती है. समस्या की जड़ वहां है. देश को उसकी पूर्णता में स्वीकार करें. नोटबंदी, कालाधन से जुड़ी पहल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए कोई यह निर्णय नहीं करता. गरीबों का भला करना था, इसलिए हमने ये फैसला किया. उन्होंने कहा कि हम आयकर घोषणा की योजना लाए. अब तक सबसे ज्यादा पैसा घोषित किया गया. उन्होंने कहा कि 1100 से ज्यादा पुराने कानून निष्प्रभावी कर दिये. नोटबंदी से जुड़े नियमों में काफी बदलने करने को लेकर विपक्ष की आलोचना पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस काम में हम जनता की तकलीफ को समझकर रास्ता बदलने का प्रयास करते थे. जो लोग अवरोध पैदा करते थे उनका रास्ता रोकना था. वर्षों से लूट करने वालों से मुकाबला था. तू डाल डाल, मैं पात पात जैसी स्थिति थी. इसलिए नियम बदलने पड़े. उन्होंने कहा कि जो आप लोगों का बड़ा प्रिय कार्यक्रम है. आप पीठ थपथपाते हैं और जो विभिन्न योजनाओं के समन्वय के बाद मनरेगा के रूप में सामने आया है..उससे जुड़े नियमों में 1035 बार परिवर्तन किये गये. आप कभी अपने तो आइने में झांकिये. मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति जी ने हम सबसे आहवान किया है कि लोकसभा, विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने पर विचार करने का समय आ गया है. ‘हर किसी को थोड़ा नुकसान होगा. लेकिन राजनीतिक तराजू पर नहीं तोलें. गंभीरता से सभी को सोचना होगा.’ मोदी ने कहा कि हर साल 4..5 चुनाव होते हैं. अध्यापकों को लगना पड़ता है. शिक्षा को नुकसान होता है. खर्च भी बढ़ रहा है. 2009 के लोकसभा चुनाव में 1100 करोड़ रपये खर्च हुए थे जबकि 2014 में 4000 करोड़ से ज्यादा खर्च हुए. उन्होंने कहा कि इस गरीब देश पर कितना बोझ पड़ रहा है. दुश्मन देश हमारे खिलाफ साजिश करते रहते हैं, इसके साथ आतंकवाद, प्राकृतिक आपदाओं के कारण सुरक्षा बलों के सामने चुनौती है. वहीं बलों को चुनाव प्रबंधन में बड़े स्तर पर लगाना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा,‘कोई एक पार्टी ऐसा नहीं कर सकती, सरकार तो कर ही नहीं सकती. हमें मिल कर रास्ता खोजना होगा. दिव्यदृष्टा के रूप में जिम्मेदार, अनुभवी लोगों को रास्ता खोजना होगा.’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के इस सुझाव को आगे बढ़ाना चाहिए. समय से पहले बजट सत्र बुलाने के बारे में आलोचनाओं का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि सवाल पूछा जा रहा है कि बजट जल्दी क्यों किया गया? हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है. भारत कृषि प्रधान देश है. कृषि की स्थिति ज्यादातार दिवाली तक पता चल जाती है. हम अंग्रेजों की परंपरा का जारी रखे हुए थे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इसे सुबह किया. कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आपकी सरकार ने भी समय बदलने पर विस्तृत समिति बनाई थी. आप भी चाहते थे. हमने उस समिति के प्रस्तावों पर काम किया. आपकी प्राथमिकता दूसरी हैं, ऐसा नहीं है कि आप चाहते नहीं थे. आपको कहना चाहिए, फायदा उठाना चाहिए कि यह भी हमारे समय हुआ था. रेल बजट का आम बजट में विलय करने के बारे में उन्होंने कहा कि परिवहन व्यवस्था को साथ में जोड़ कर देखने की जरूरत है. रेल बजट का विलय किया गया है लेकिन रेलवे मुख्यधारा में रहेगी. समग्र सोच के साथ रेल को भी अन्य परिवहन के साथ देखा जा सकेगा. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पहले रेल बजट में बताया था कि पहले की 1500 घोषणाएं लंबित थी. पहले रेल बजट में सभी को खुश करने के लिए कोई घोषणा की जाती थी. लेकिन किसी को तो गलत चीजों को रोकने की जिम्मेदारी लेनी होगी. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लोगों की आशा..आकांक्षाओं के लिए अच्छे फैसले लेने पड़ते हैं और हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. हम इस काम को कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कोयला, टूजी का जिक्र आता था. जल, वायु, आसमान के भ्रष्टाचार में कितना गया, इस बारे में चर्चा होती थी. लेकिन अब सकारात्मक बदलाव आया है. पहले आवाज उठती थी कितना गया, अब आवाज आती है मोदी कितना लाये. यही तो सही कदम है. अपनी सरकार की योजनाओं और उन्हें लागू करने की रफ्तार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पर भी आप :कांग्रेस: कहेंगे कि यह तो हमने शुरू किया था. उन्होंने कहा कि आपने इसे शुरू किया लेकिन 2011-14 तक तीन साल तक केवल 59 गांर्वा में यह नेटवर्क लगा. और उसमें भी लास्ट माइल कनेक्टिविटी का प्रावधान नहीं था. खरीद भी पूरी तरह केंद्रीकृत थी, कारण सब जानते हैं. मोदी ने कहा कि हमने पूरी कार्य संस्कृति बदली. पहले सभी राज्यों को साथ में लिया. लास्ट माइल कनेक्टिविटी की प्राथमिकताओं को तय किया. स्कूल, अस्पताल, पंचायत तक को प्राथमिकता बनाया. खरीद को विकेंद्रीकृत कर दिया. परिणाम यह आया कि इतने कम समय में 76000 गांवों में अब तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क लास्ट माइल कनेक्टिविटी के साथ पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि आप :कांग्रेस: ही कह रहे थे कि राजीव गांधी कंप्यूटर लाऐ, मोबाइल फोन लाएं ... जब मैं मोबाइल फोन को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की बात कर रहा हूं तो आप कह रहे हैं कि मोबाइल फोन है कहां. प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवा 100 प्रतिशत नहीं हो सकती है तो क्या अगर 40 प्रतिशत कर सकते हैं तो उसे आगे नहीं बढ़ाना चाहिए ? प्रोत्साहन देना नेतृत्व का काम होता है. उन्होंने कहा कि आप मोदी का विरोध कर रहे हैं कोई बात नहीं, आपका काम भी है. लेकिन अच्छी चीजों को भी तो आगे बढ़ाएं. देश का भला होगा. ऐसी चीजों में मदद कर सकते हैं तो करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत आपके समय में 69 किलोमीटर प्रति दिन सड़क बन रही थी, हमारी सरकार में यह 111 किलोमीटर प्रति दिन है. हमने सड़क बनाने में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया. रेलवे में ड्रोन का इस्तेमाल कर नजर रखते हैं. इन मुद्दों के बहाने पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी पर साधा निशाना!
एजेंसी | 07 Feb 2017 04:52 PM (IST)
नयी दिल्ली : भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ अपनी सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर निर्णायक शासन देने में विफल रहने के लिए तीखा प्रहार किया और कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, उसे देश को जवाब देना होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ जिस रास्ते पर उन्होंने कदम बढ़ाए हैं, वह उस रास्ते से पीछे लौटने वाले नहीं हैं.. वह गरीबों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे. कुछ समय पहले दिये गए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ‘भूकंप’ से जुड़े बयान पर चुटकी लेते हुए मोदी ने कल देश के कुछ हिस्सों में आए भूकंप का जिक्र किया और कहा कि ‘आखिर भूकंप आ ही गया. धमकी तो बहुत पहले ही मिल चुकी थी लेकिन कल भूकंप आ ही गया. कांग्रेस उपाध्यक्ष पर परोक्ष निशाना साधते हुए उन्होंने कहा,‘जब कोई स्कैम में सेवाभाव देखता है, स्कैम में नम्रता देखता है तो सिर्फ मां ही नहीं, धरती मां भी दुखी हो जाती है और तब भूकंप आता है.’ उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले राहुल गांधी ने कहा था कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है और जब मैं बोलूंगा तो भूकंप आ जायेगा. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी का फैसला अकेले और अचानक करने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार का प्रस्ताव तब आया था जब इंदिराजी की सरकार थी और यशवंत राव चव्हाण उनके पास गए थे. तब इसे आगे इसलिए नहीं बढ़ाया गया क्योंकि आपको (कांग्रेस) चुनाव की चिंता थी. हमें चुनाव की चिंता नहीं है, हमारे लिये देशहित महत्वपूर्ण हैं.