हर घर तक LPG और बायोफ्यूल्स पहुंचाने टारगेट, हरदीप पुरी बोले- खाना बनाने का खर्च हुआ 5 रुपए
India Energy Week 2025 : हरदीप सिंह पुरी ने मिनिस्टीरियल राउंड टेबल बैठक में कहा कि भारत में लोगों के पास स्वच्छ खाना पकाने की गैस उपलब्ध है, जिसकी लागत एक दिन में 7 सेंट से ज्यादा नहीं होती.

India Energy Week 2025: इंडिया एनर्जी वीक 2025 दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 11 फरवरी से शुरू हो चुका है. बुधवार (12 फरवरी, 2025) को इसका दूसरा दिन है, जिसमे भारत ने 12 फरवरी 2025 को इंडिया एनर्जी वीक (IEW) के दौरान स्वच्छ रसोई मंत्रिस्तरीय बैठक की मेजबानी की, जिससे दुनिया भर में स्वच्छ रसोई तक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत ने महत्वपूर्ण कदम उठाया. इस बैठक में अफ्रीका और एशिया के कई ऊर्जा मंत्रियों और उप मंत्रियों ने हिस्सा लिया. इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर मिलकर काम करना है ताकि सभी को स्वच्छ रसोई की सुविधा मिल सके, जिससे स्वास्थ्य में सुधार, लैंगिक समानता को बढ़ावा और पर्यावरण की सुरक्षा हो सके.
भारत के पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने इसकी मेजबानी करते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि, 'यह विषय इतना महत्वपूर्ण क्यों है? एक कारण यह है कि दुनिया में हुई सारी प्रगति के बावजूद 2.3 अरब लोग अभी भी खाना बनाने के लिए प्रदूषित करने वाले ईंधन जैसे लकड़ी, कोयला, और गोबर का उपयोग करते हैं. इसका सेहत, महिलाओं की स्थिति, पर्यावरण और कई अन्य समस्याओं पर बुरा असर पड़ता है. यह एक सच्चाई है. हर साल कितने लोगों को स्वास्थ्य पर प्रतिकूल या हानिकारक परिणाम भुगतने पड़ते हैं? एक अनुमान के अनुसार, हर साल 30 लाख समय से पहले मौतें होती हैं, जबकि IEA का कहना है कि यह संख्या 37 लाख है और UNEP के अनुसार यह 31 लाख है. महिलाओं और बच्चों पर इसका सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अगर लिंग के दृष्टिकोण से देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि हमारी कई बहनें और बेटियां हर दिन 5 घंटे ईंधन इकट्ठा करने और खाना बनाने में लगाती हैं. यह मानव श्रम और समय की कितनी बड़ी बर्बादी है.
ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य बेहद जरूरी
हरदीप सिंह पुरी ने मिनिस्टीरियल राउंड टेबल बैठक के दौरान कहा अब तक जितने भी ऊर्जा के क्षेत्र में कार्य हुए हैं. उसमें सबसे पसंदीदा पहलू उनके लिहाज से यही है. उन्होंने कहा, 'मुझे क्यों लगता है कि ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए सभी कार्यों में से यह पहलू मेरे पसंदीदा पहलुओं में से एक है? और मैं इसका कोई श्रेय नहीं लेता हूं. मैं इस मंत्रालय में केवल साढ़े तीन साल से हूं, जबकि यह पहल मुझसे बहुत पहले शुरू हुई थी. हरदीप सिंह पुरी ने अपने छात्र जीवन में एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए मुश्किलें जो सामने आती थी उसके बारे में उद्धरण देते हुए पैनल पर बैठे मंत्रियों के साथ क्लीन कुकिंग के विषय पर चर्चा की. उन्होंने कहा, 'मुझे अपने छात्र जीवन के दिनों की याद आती है, जब मैं विश्वविद्यालय में था. उस समय एलपीजी (द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस), जो एक रिफाइनरी का उत्पाद है का सिलेंडर लेना बहुत मुश्किल था. इसके लिए बहुत सारे संपर्कों की आवश्यकता होती थी. आपको लोगों को जानना पड़ता था. बड़ी मुश्किल से अगर कोई सिफारिश होती तभी एलपीजी सिलेंडर मिल पाता था.
प्रधानमंत्री मोदी ने घर-घर तक पहुंचा एलपीजी
मंत्री स्तरीय बैठक के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री को घर घर तक एलजी पहुंचने का श्रेय दिया. उन्होंने कहा जब प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यभार संभाला, उस समय भारत में कुल एलपीजी कनेक्शन की संख्या 14 करोड़ थी, यानी 140 मिलियन. हमारी जनसंख्या 1.4 अरब (140 करोड़) है तो अगर केवल 140 मिलियन कनेक्शन हों तो यह पर्याप्त नहीं है. लेकिन आज उन्होंने इस संख्या को 140 मिलियन से बढ़ाकर लगभग 330 मिलियन तक पहुंचा दिया है. अगर मान लें कि प्रत्येक कनेक्शन चार या पांच लोगों के परिवार को सेवा देता है...इसका मतलब है कि अब ऐसी स्थिति है जिसमें लगभग पूरी जनसंख्या के पास एलपीजी की सुविधा है. इसके अलावा, हमारे पास एक पाइपलाइन भी है जिसके जरिए हम प्राकृतिक गैस भेजते हैं, जो लगभग 25-30 फीसदी सस्ती होती है, लेकिन मेरी असली बात क्या है?
भारत में अगर आप आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किसी सरकारी योजना के लाभार्थी हैं तो आपके लिए स्वच्छ खाना पकाने की गैस उपलब्ध है, जिसकी लागत एक दिन में 7 सेंट से ज्यादा नहीं होती और यह 7 सेंट भी डॉलर के विनिमय दर पर निर्भर करता है. अगर आप आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की योजना के लाभार्थी नहीं हैं तो आपको एक दिन में लगभग 15 सेंट खर्च करने होंगे. दूसरे शब्दों में स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन लगभग सभी के लिए उपलब्ध है और यह अब कोई समस्या नहीं है.
महामारी के दौरान लोगों को राशन देकर मदद की गई
मिनिस्ट्रियल बैठक के दौरान मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए सरकार की तरफ से लोगों की मदद के दौरान राशन पहुंचाने का काम किया गया था, जिसका जिक्र उन्होंने इस बैठक के दौरान किया और कहा कि महामारी के कारण हमने हर परिवार को दिन में तीन बार सूखा राशन उपलब्ध कराया. यह अभी भी जारी है क्योंकि स्थिति अभी तक सामान्य नहीं हुई है तो आप उस स्तर पर लोगों के लिए जीवन को आसान बनाते हैं, लेकिन मेरे दृष्टिकोण से इस IEW सत्र का असली महत्व यह है कि हमारे पास नए अनुबंधों पर बेहतरीन चर्चा हो रही है, जैसे कि बायोफ्यूल्स के लिए साझेदारी.
कई देशों के साथ हुई चर्चा का जिक्र किया
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपनी इस डिस्कशन के दौरान बताया कि उन्होंने कई देशों के साथ चर्चा की है और लगातार चर्चाएं जारी है. उन्होंने कहा, मेरी अभी ब्राज़ील के साथ एक बैठक हुई और हमारे पास एक उत्कृष्ट पैनल चर्चा भी थी, जिसमें उप-प्रधानमंत्री और मैंने क़तर और यूके के दोस्तों के साथ भाग लिया. यह ऐसा कुछ है जो आसानी से किया जा सकता है और मुझे लगता है कि आपकी भी यही टिप्पणी थी. मुझे कोई कारण नहीं दिखता कि क्यों हम LPG, जो कि एक रिफाइनरी का उत्पाद है को हर नागरिक तक नहीं पहुंचा सकते या फिर बायोफ्यूल्स, कुकटॉप्स या किसी अन्य तरीके से यह संभव नहीं हो सकता. मेरे हिसाब से यह उन चीजों में से एक है, जिसे कम समय में किया जा सकता है.
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) भारत की ताकत
भारत के इस अभियान की नींव प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) है. इस योजना के तहत 10.33 करोड़ से अधिक परिवारों को एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन दिए गए हैं, जिससे हर दिन 13 लाख से ज्यादा सिलेंडर की रिफिल की जा रही है. सरकार की मजबूत नीतियों और प्रयासों से भारत में प्रति व्यक्ति एलपीजी की खपत साल में 4 से अधिक रिफिल तक पहुंच गई है, जिससे भारत लगभग सभी घरों में एलपीजी पहुंचाने के लक्ष्य के करीब है.
उज्ज्वला योजना
मंत्रालय की तरफ से उज्ज्वला योजना को लेकर भी जानकारी दी गई, जिसमें बताया गया कि उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को केवल 500 रुपये में सिलेंडर मिलता है, जिससे एक परिवार का रोजाना खाना बनाने का खर्च सिर्फ 5 रुपये (लगभग 7 सेंट) होता है. भारत ने इस योजना को सफल बनाने के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन), अधिक बॉटलिंग प्लांट और गांव-गांव तक सिलेंडर पहुंचाने के लिए एक बेहतरीन डिलीवरी नेटवर्क बनाया है.
कई देशों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की सराहना की
इस बैठक में भाग लेने वाले कई देशों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की जमकर सराहना की और अपने देशों में भी इसी तरह की योजना लागू करने में भारत के अनुभव और ज्ञान से सीखने की इच्छा जताई. भारत ने यह भरोसा दिलाया कि वह अपने अनुभव, तकनीक और क्षमताओं को साझा करके वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस बैठक से वैश्विक स्तर पर स्वच्छ रसोई और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद जगाता है.
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Source: IOCL
























