नई दिल्ली: "हम कश्मीर में पैलेट गन का इस्तेमाल रोकने का आदेश दे सकते हैं. क्या आप हमें भरोसा दिलाएंगे कि वहां पत्थरबाज़ी रोक दी जाएगी?" ये सवाल सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन से पूछा है. बार एसोसिएशन पैलेट गन का इस्तेमाल बंद करने की मांग की है.

चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि पत्थरबाज़ी और उपद्रव के दौरान आखिर सकारात्मक बातचीत कैसे हो सकती है? याचिकाकर्ता सभी पक्षों से बात करें और बताए कि हालात कैसे सुधारे जा सकते हैं?

कोर्ट में मौजूद एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा, "कश्मीर के हालात परेशान करने वाले हैं. लेकिन बातचीत सिर्फ राजनीतिक पार्टियों से हो सकती है. आज़ादी मांगने वाले अलगाववादियों से कोई बातचीत नहीं होगी."

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने पैलेट गन से लोगों को पहुंचे नुकसान का हवाला दिया है. सुप्रीम कोर्ट भी सरकार से पूछ चुका है कि क्या कम नुकसान करने वाले विकल्पों का इस्तेमाल हो सकता है? सरकार की दलील है कि बेहद ज़रूरी हालात में ही पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है.

आज कोर्ट ने बात आगे बढ़ाते हुए बार एसोसिएशन के वकील से पूछ लिया कि क्या वो सड़कें खुलवाने, पत्थरबाज़ी रुकवाने का आश्वासन दे सकते हैं? कोर्ट ने कहा कि आप ये दलील नहीं दे सकते कि आप पत्थरबाज़ों और अलगाववादियों की नुमाइंदगी नहीं करते. अगर आप यहाँ तक पहुंचे हैं तो सभी पक्षों से बात कर हल निकालने की ज़िम्मेदारी भी आपकी है. मामले में अगली सुनवाई 9 मई को होगी.