भारतीय विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट के नागरिकता के सबूत न होने के बयान पर जमकर हंगामा हो रहा है. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार से वैचारिक और राजनीतिक असहमति रखने वाले लोगों को मनमाने ढंग से नागरिकता के अधिकार से दूर करने की जमीन तैयार की जा रही है. उधर, सरकार ने दो टूक कहा है कि पासपोर्ट कभी नागरिकता का सबूत था ही नहीं. सरकार ने पिछले 12 वर्षों में इस डॉक्यूमेंट को लेकर कोई नया फैसला नहीं लिया है.

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'पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा'

न्यूज एजेंसी PTI ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि, 'यह अभी तय नहीं किया गया कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है. पिछले 12 वर्षों में भी ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया. पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा है.' सरकारी सूत्रों ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 का हवाला देते हुए कहा कि 'जनहित' में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट दिया जा सकता है.

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सूत्रों ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा-20 का भी हवाला दिया, जिसके मुताबिक उन लोगों को भी भारतीय पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं, जो भारत के नागरिक नहीं हैं. उन्होंने इस अधिनियम की धारा-6(2)(ए) का भी जिक्र किया,'जो यह प्रावधान करती है कि अगर आवेदक भारत का नागरिक नहीं है तो पासपोर्ट प्राधिकरण उसे पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर देगा.'

किस बयान पर छिड़ा विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ, जब मीडिया में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से खबर आई कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का सबूत. विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को कहा था कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है. उधर, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के लिए अपनी पात्रता साबित करने के लिए मतदाताओं को जिन 12 वैध सहायक दस्तावेजों की जरूरत होती है, उनमें पासपोर्ट अब भी शामिल है.

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विपक्ष ने लगाए थे सरकार पर आरोप

विपक्षी दल कांग्रेस ने विदेश मंत्रालय के बयान की आलोचना की. पार्टी ने आरोप लगाया कि उन भारतीयों के नागरिक अधिकारों को मनमाने ढंग से नकारने की जमीन तैयार कर रही है, जिनसे उसकी वैचारिक या राजनीतिक असहमति है. कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने पहले अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए कुछ समुदायों के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए थे.

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