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मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते सदन आएंगे शाह? FCRA बिल पर संभालेंगे मोर्चा, कांग्रेस भी तैयार

Parliament Monsoon Session 2026: केंद्र सरकार 10 जुलाई को सदन में FCRA संशोधन बिल पेश और पारित करा सकती है. इसी को देखते हुए कांग्रेस ने अपने सांसदों से सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है.

संसद के मानसून सत्र में सोमवार (10 अगस्त 2026) को सरकार सदन में कुछ अहम बिल पेश कर सकती है, जिसे देखते हुए कांग्रेस ने अपने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के लिए एक तीन-लाइन का व्हिप जारी किया है. अगला हफ्ता संसद के मानसून सत्र का आखिर हफ्ता है और ये इस बात की अटकलें लगाई जा रही है कि सरकार 10 जुलाई को FCRA संशोधन बिल सदन में पेश करने और इसे पास कराने की तैयारी कर रही है. इसी को देखते हुए कांग्रेस ने अपने सांसदों से 10, 11 और 12 अगस्त (सोमवार से बुधवार) को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है. 

FCRA बिल को लेकर कांग्रेस ने कसी कमर

कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों से भी अनुरोध किया है कि वे इन तीन दिनों के दौरान अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करें. वहीं बीजेपी ने भी अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए कहा है. हालांकि संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अगले हफ्ते के संभावित सरकारी कामकाज की जो जानकारी दी है, उसमें फिलहाल FCRA बिल या संविधान संशोधन बिल का जिक्र नहीं है. वहीं संसद में हंगामे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके कार्यालय में मुलाकात की. यह बैठक संसद भवन में लगभग एक घंटे तक चली.

प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर के दान में कथित चोरी के मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान जारी है, जिस वजह सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है. विपक्ष 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगने पर अड़ा हुआ है और लगातार हंगामा कर रहा है. वहीं डिलिमिटेशन बिल को लेकर भी सरकार विपक्ष से बातचीत कर रही है. संसदीय कार्यमंत्री किरन रीजीजू तीन बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बात कर चुके हैं.

एनडीए सांसदों से पीएम मोदी ने की मुलाकात

संसद का मौजूदा मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और यह 13 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुक्रवार सुबह अपने आवास पर एनडीए के सांसदों से मुलाकात की, जिसमें एनसीपीआई में शामिल हुए बागी तृणमूल कांग्रेस के सांसद और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए शिवसेना (यूबीटी) के सांसद शामिल थे. इस बैठक का इसका मकसद सत्ताधारी गठबंधन के बीच तालमेल को बेहतर बनाना और संसदीय कामकाज में अधिक भागीदारी को बढ़ावा देना था. इस बैठक से सांसदों को अपने विचार साझा करने और शासन, विकास और जन-कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का मौका मिला. बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को दिल्ली के नैरेटिव के जाल में न फंसने और विपक्ष के सदस्यों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की सलाह भी दी. 

FCRA बिल पास नहीं होने देंगे: कांग्रेस

केंद्र सरकार की ओर से लाए गए FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भी कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जब संसद का कामकाज सुचारु रूप से नहीं चल रहा है, तब सरकार इतने महत्वपूर्ण बिल को जल्दबाजी में पारित नहीं करा सकती. उनका कहना था कि इस बिल का असर लाखों लोगों, गैर-सरकारी संगठनों और अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस विधेयक का जोरदार विरोध करेगी और इसे पारित नहीं होने देगी.

सरकार के 22 जुलाई को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, वैश्विक वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल लेनदेन और सीमा-पार फंडिंग व्यवस्थाओं के तेजी से बढ़ने से वित्तीय पारदर्शिता, विदेशी प्रभाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां सामने आई हैं. इसी कारण कई लोकतांत्रिक देशों में विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करना सुशासन का एक सामान्य और स्वीकार्य हिस्सा बन गया है.

सरकार का कहना है कि एफसीआरए को इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में समझा जाना चाहिए. यह कानून वैध और वास्तविक सामाजिक या परोपकारी गतिविधियों को रोकने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसा कानूनी ढांचा उपलब्ध कराना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रह सके और विदेशी योगदान भारतीय कानूनों के अनुसार प्राप्त, उपयोग और दर्ज किए जा सकें.

क्या है FCRA, जिस पर मचा है बवाल

एफसीआरए वह कानून है जो यह तय करता है कि भारत के व्यक्ति, संगठन, गैर-सरकारी संस्थाएं (NGO), ट्रस्ट और कंपनियां विदेशों से मिलने वाले धन को किस तरह प्राप्त और उपयोग कर सकती हैं. इसका संचालन गृह मंत्रालय करता है. एफसीआरए तीन मुख्य काम करता है. यह तय करता है कि कौन विदेशी योगदान स्वीकार कर सकता है और किन शर्तों पर. यह निर्धारित करता है कि उस धनराशि को कैसे प्राप्त किया जाए, उसका हिसाब-किताब कैसे रखा जाए और उसकी रिपोर्ट कैसे दी जाए. यह कुछ सीमित और स्पष्ट रूप से परिभाषित विदेशी फंड से चलने वाली गतिविधियों पर रोक लगाता है, जो भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं.

विक्रम कुमार एबीपी न्यूज़ में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं और डिजिटल टीम का हिस्सा हैं. एबीपी लाइव के नेशनल डेस्क पर विक्रम देश और विदेश की राजनीति से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ पर इनका विशेष फोकस रहता है. देश-विदेश के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर लिखते रहते हैं. यूएस-ईरान युद्ध के दौरान इन्होंने कई इन-डेप्थ खबरें की हैं जिन पर कई मिलियन व्यूज आए. साल 2023 में प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मास मीडिया हिंदी में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद एबीपी लाइव के साथ करियर की शुरुआत की. Email: vikramk@abpnetwork.com

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