पाकिस्तान जाएंगे 261 सिख, पड़ोसी मुल्क ने पहले कहा-No, फिर दे दिया वीजा, जानें क्या है वजह
Pakistan Issued Visa To J-K Pilgrimage : बैसाखी पर जम्मू-कश्मीर के सभी श्रद्धालु पाकिस्तान में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब, गुरुद्वारा पंजा साहब सहित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों का दर्शन करेंगे.

Indian Sikh Pilgrimage got PAK Visa : बैसाखी के पावन अवसर पर पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए जम्मू से 261 सिख यात्रियों का जत्था अमृतसर के लिए रवाना हुआ. जम्मू-कश्मीर के 261 सिख श्रद्धालु इस बार सीमापार कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों का दर्शन करेंगे. इस बार जम्मू-कश्मीर से कुल 261 श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान जाने के लिए वीजा के लिए अप्लाई किया था और ऐसा पहली बार हुआ है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के सभी 261 सिख श्रद्धालुओं के वीजा आवेदन को स्वीकार कर लिया. इस पहले पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के सभी श्रद्धालुओं के वीजा को क्लियर नहीं किया था.
खालसा पंथ के स्थापना दिवस बैसाखी पर जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाने वाले सिख श्रद्धालु सीमा पार गुरुद्वारा करतारपुर साहिब, गुरुद्वारा पंजा साहब, गुरुद्वारा डेरा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे.
सिख श्रद्धालुओं को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव, श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस और बैसाखी पर पाकिस्तान में धरती पर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों में जाने का मौक मिलता है. हालांकि, कई बार ऐसे मौकों पर कई श्रद्धालुओं को वीजा नहीं मिलता है. लेकिन इस साल बैसाखी के मौके पर जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाने वाले सभी श्रद्धालु इन गुरुद्वारों के दर्शन कर पाएंगे.
बाघा बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान में प्रवेश करेंगे भारतीय श्रद्धालु
पाकिस्तान जाने के लिए श्रद्धालुओं के पासपोर्ट पर मंगलवार (8 अप्रैल) को वीजा जारी कर दिया गया था. इसके बाद सभी वीजा आवेदकों के बीच जम्मू के गांधी नगर के गुरुद्वारा बाबा फतेह सिंह में वीजा लगे पासपोर्ट बांटे गए थे. पासपोर्ट पर वीजा लगने के बाद जम्मू से सिख श्रद्धालुओं के जत्था बुधवार (9 अप्रैल) की रात नौ बजे पंजाब के अमृतसर के लिए रवाना हुआ. इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था गुरुवार (10 अप्रैल) को अमृतसर होते हुए बाघा बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान में प्रवेश करेगा.
ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए सीमा पार पाकिस्तान जा रहा श्रद्धालुओं का जत्था करीब 12 दिनों तक पाकिस्तान की यात्रा करेगा. इसके बाद सभी श्रद्धालु वापस भारत लौट आएंगे.

























