Pakistan Imran Khan: पाकिस्तान की सियासत में लंबे समय से इमरान खान (Imran Khan) चर्चा में बने हुए हैं. इस बार जो उनके बयान सामने आए हैं उनसे यह तो साफ है कि प्रधानमंत्री रहते हुए उनकी कई ख्वाहिशें पूरी नहीं हुई हैं. इमरान के हाथ से जब से सत्ता गई है वह अक्सर ही भारत की तारीफ के पुल बांधते नजर आते हैं. उनकी तारीफों के पीछे कई ऐसी बातें थीं, जिनसे ये साफ होता है कि वह एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने की चाह तो जरूर रखते हैं. इसलिए पाकिस्तान में इस बार अगर उनकी सरकार आती है तो माना जा रहा है कि वह भारत के साथ रिश्तों को लेकर कई बड़े फैसले ले सकते हैं.
इमरान खान ने कहा कि वह अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ तनावपूर्ण संबंध सुधारना चाहते थे, लेकिन कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करना इसमें ‘बाधक’ बन गया. साथ ही उन्होंने भारत की विदेश नीति की भी जमकर तारीफ की. जिस तरह से वह पाकिस्तान में राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ने की कोशिशों के बीच भारत की तारीफ कर रहे हैं इससे ऐसा लगता है कि वह कोई बड़ी राजनीतिक चाल चल रहे हैं.
पाकिस्तान में सियासी भूकंप ला सकते हैं इमरान
उनके बयानों से यह तो साफ है कि अगर अब पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार आती है तो वह कुछ अलग जरूर करने वाले हैं. उन्होंने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाने को लेकर विशेष जोर दिया है. वह समय से पहले पाकिस्तान में चुनाव चहते हैं और इसे लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. हाल ही में यह भी कहा था कि वह खुद नेशनल असेंबली में जाएंगे और अपने सभी साथियों के साथ इस्तीफे की पेशकश करेंगे. वह पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा विधानसभाओं को भंग करेंगे.
अब सरकार आई तो क्या करेंगे इमरान खान?
सत्ता खोने के साथ ही इमरान खान पाकिस्तान के ऐसे पूर्व पीएम बन गए थे, जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर किया गया. इमरान अगस्त 2018 में नया पाकिस्तान बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे और उनके पद छोड़ते समय पाकिस्तान महंगाई की मार और विदेशी कर्ज जैसे मुद्दों से जूझ रहा था, लेकिन इसके बाद से ही उनके तेवर भारत के लिए बदले-बदले हैं. उनके बयानों से ऐसा लगता है कि वह इस बार भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाने के मूड से सत्ता में वापसी करेंगे.
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि भारत की तरफ से 2019 में कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद उनकी सरकार ने बातचीत पर जोर नहीं दिया. हम चाहते हैं कि भारत पहले अपने फैसले को पलटे और शांति बातचीत करे. जनरल बाजवा भी भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने के इच्छुक थे. पीएम मोदी को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी विश्वास है कि दक्षिणपंथी पार्टी का नेता ही संघर्ष को हल कर सकता है. मोदी दक्षिणपंथी पार्टी से हैं, इसलिए वह चाहते थे कि वह सत्ता में लौटें और कश्मीर मुद्दे को हल करें.
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