पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद भी पर्यटन व्यापार से जुड़े सभी लोगों के लिए ज़िंदगी को पटरी पर लाना अभी भी एक संघर्ष बना हुआ है. पर्यटकों ने वापस आना शुरू कर दिया है, पोनीवालों ने उनका स्वागत करना शुरू कर दिया है, लेकिन हमले के ज़ख्म अभी भी दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि बैसरन घाटी सहित कई पर्यटन स्थल अभी भी आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं.

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बैसरन घाटी की ओर जाने वाली सड़क पर कंटीले तार लगे हुए हैं और हथियारबंद अर्धसैनिक जवान रखवाली कर रहे हैं. पहलगाम से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित बैसरन घाटी 22 अप्रैल, 2025 के नरसंहार का मुख्य केंद्र थी और कई पर्यटक इस घाटी में जाना चाहते हैं लेकिन सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण एक साल बीत जाने के बाद भी किसी भी पर्यटक को बैसरन घाटी या पहलगाम के अन्य पर्यटन स्थलों पर जाने की अनुमति नहीं है.

पहलगाम घाटी के सिर्फ 2 स्थल ही खुलेपहलगाम घाटी के भीतर बंद किए गए 13 पर्यटन स्थलों में से केवल दो बेताब घाटी और अरु घाटी कुछ शर्तों के साथ फिर से खोले गए हैं. यहां पर्यटकों को शाम 4 बजे से पहले ही निकलना पड़ता है, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वहीं चंदनवाड़ी, दुबयान, शिकारगाह, विमलेश्वर मंदिर, डियर पार्क, लैवेंडर पार्क और अल्पाइन झीलों जैसे अन्य स्थल, बैसरन घाटी के साथ-साथ पर्यटकों के लिए अभी भी बंद हैं.

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क्या बोले अब्दुल वहीदपोनी एसोसिएशन के तब के अध्यक्ष अब्दुल वहीद ने कहा कि जब हम बैसरन पहुंचे वहां सनाटा था और हम ने हर तरफ़ लाशें देखी और औरतें चिल्ला रही थी. लाश देख कर दिल सिहर जाता है मैंने अपने दिल को जानवर जैसा बनाया और ज़ख्मियों को उठाया. मैं उस दिन को भूल नहीं सकता, क्योंकि उस दिन की तस्वीरें आज भी मेरी आंखों के सामने कौंध जाती हैं. उन्होंने आगे बताया कि सभी के सिर में गोली लगी थी, ख़ून बह रहा था. वह दृश्य आज भी मेरी आंखों के सामने है और अगर वह दरिंदे ज़िंदा हैं तो उनको अंजाम तक पहुंचा देना चाहिए लेकिन हम पर्यटकों के साथ हैं और पहलगाम को दोबारा पूरी तरह से खोलना चाहिए.

रायेस अहमद ने कहा कि वह मंज़र जो हमने देखा वह किसी को ना देखना पड़े दुनिया में और जब हमने लाशें देखी तो हम सहम गए थे. हम भी डर गए थे कि कहीं आतंकी पास ना हो और हमको भी मार डाले. फिर भी हमने लोगों की मदद की और उसके बाद हमको भी पूछताछ के लिए बुलाया गया. मैं भी 8 दिन तक एनआईए की हिरासत में रहा लेकिन हमको कोई शिकायत नहीं है. 

पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले 26 पर्यटकों की याद में पहलगाम सेल्फ़ी पॉइंट पर एक स्मारक बनाया गया है, जहां पर्यटक और स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने आते हैं. बेंगलुरु की एक पर्यटक सागरिका बर्मन, जो अपनी मां के साथ कश्मीर घूमने आई हैं, उन्होंने पहलगाम में मारे गए पर्यटकों को श्रद्धांजलि दी.

पर्यटकों ने क्या बतायाविमल राठी, जो अपनी पत्नी आस्था के साथ हनीमून पर कश्मीर आए हैं, उन्होंने कहा, "जब हम देर शाम यहां पहुंचे तो हम थोड़े डरे हुए थे लेकिन सुरक्षा-व्यवस्था देखकर हमें सुरक्षित महसूस हुआ. हम खूबसूरत बैसरन घाटी जाना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से हम वहां नहीं जा पाए." उन्होंने आगे कहा, "हमें अपनी सेनाओं पर पूरा भरोसा और विश्वास है. पिछले साल जो कुछ हुआ, वह नहीं होना चाहिए था. हम अगले साल फिर आएंगे, लेकिन बैसरन घाटी ज़रूर जाएंगे."

पहलगाम विकास प्राधिकरण (Pahalgam Development Authority) पहलगाम घाटी को पर्यटकों की यात्रा सूची में वापस लाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत कर रहा है. पिछले 11 महीनों के दौरान, प्राधिकरण ने पर्यटकों को वापस लुभाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं और यहां तक कि पर्यटन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में पर्यटकों को भी शामिल किया है.

PDA के CEO का बयानपहलगाम विकास प्राधिकरण के CEO मीर नसरोल हिलाल ने कहा, "हमने पर्यटन उद्योग को वापस पटरी पर लाने के लिए बहुत काम किए हैं. विंटर फेस्टिवल का आयोजन किया, कपल रेस जैसे आयोजन किए और स्प्रिंग फेस्टिवल का आयोजन किया, जिसका उद्घाटन एक पर्यटक बच्चे से करवाया ताकि लोगों में मैसेज भी जाये और लोग पहलगाम को सुरक्षित मानें." 

अनंतनाग के पूर्व विधायक रफ़ी मीर ने कहा, "अभी भी कुछ पर्यटन स्थल बंद हैं, जिससे गलत मैसेज जाता है. इससे पहले भी आतंकी घटनाएं हुई हैं. भले ही पर्यटकों को धर्म के नाम पर पहली बार निशाना बनाया गया हो लेकिन हमें आगे बढ़ना होगा और उस हमले की यादों से बाहर निकलना होगा. एक बुरा सपना समजकर भूलना होगा."

क्या बोले पहलगाम होटल मालिक संघ के अध्यक्षपहलगाम होटल मालिक संघ के अध्यक्ष मुश्ताक पहलगामी ने कहा कि हम उन पहले लोगों में से थे, जिन्होंने हमले के बाद सड़कों पर उतरकर 2025 में आतंकवाद के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन अब हम चाहते हैं कि पूरा देश आगे आए और पहलगाम आकर यहां के स्थानीय लोगों का समर्थन करे. ऐसा करके हम उन आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को नाकाम कर देंगे, जिनका मकसद कश्मीर को तबाह करना था.

उन्होंने कहा, "अब मैं प्रधानमंत्री से अपील करता हूं कि वे एक ट्वीट करके लोगों से पहलगाम आने का आग्रह करें. साथ ही स्थानीय प्रशासन को भी सभी बंद पड़े पर्यटन स्थलों को फिर से खोल देना चाहिए, क्योंकि इन जगहों का लगातार बंद रहना केवल उन बुरे लोगों के ही फ़ायदे में है."

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