भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए 7 मई 2025 की रात करीब 1:05 बजे 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया. तीनों सेनाओं के इस संयुक्त अभियान में 22 मिनट के अंदर पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के 9 प्रमुख ठिकानों को तबाह कर दिया. इसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. आज इस ऑपरेशन को 1 साल पूरा हो गया है. इस मौके पर जानते हैं कि इस संघर्ष से भारत ने दुश्मन को पस्त करने के कौन से 5 बड़े सबक सीखे.

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1. बदला लेने में देर नहीं, सीधे निशाने पर मारना

भारत की पुरानी सोच थी कि हम हमले के बाद बहुत सोच-विचार करें और सब्र रखें. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह सोच पूरी तरह बदल दी.

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  • अब एक्शन तुरंत होगा: सेना के एक बड़े अफसर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि भारत ने 'रणनीतिक सक्रियता' अपना ली है. मतलब यह कि दुश्मन जैसे ही कुछ करेगा, उसे उसी वक्त करारा जवाब मिलेगा.
  • सिर्फ गुनहगारों पर वार: यह कोई बिना सोचे-समझे किया गया हमला नहीं था. रिटायर्ड एयर मार्शल एसपी धारकर ने बताया कि हर निशाना बहुत सोच-समझकर चुना गया था, ताकि सिर्फ उन आतंकियों और उनके मददगारों को सजा मिले जो पहलगाम हमले में शामिल थे.
  • सीख: दुश्मन को लगता था कि सीमा पार बैठकर वार करने से वो बच जाएगा. लेकिन इस ऑपरेशन ने साफ कर दिया कि अब कोई भी जगह उनके लिए सुरक्षित नहीं है.

2. तीनों सेनाओं ने मिलकर एक साथ तहलका मचाया

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत थी कि थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने एक साथ मिलकर पूरी ताकत से हमला किया.

  • पूरी तैयारी के साथ: यह पहली बार था जब तीनों सेनाओं ने एक ही कमांड के तहत इतना बड़ा ऑपरेशन किया. जमीन पर सेना ने, हवा में एयरफोर्स ने और समुद्र में नेवी ने चारों तरफ से दुश्मन को घेर लिया.
  • सिर्फ सेना नहीं, पूरा देश: इस ऑपरेशन में सिर्फ फौज ही नहीं, बल्कि हमारी जासूसी एजेंसियों, साइबर टीम, सीमा सुरक्षा बल और विदेश मंत्रालय ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किया. इसे कहते हैं 'संपूर्ण-सरकार' दृष्टिकोण, यानी सरकार का हर विभाग एक साथ.
  • सीख: दुश्मन से अकेले नहीं, बल्कि पूरी ताकत से और सबको साथ लेकर निपटना चाहिए.

3. पाकिस्तान के 'परमाणु बम' वाले झांसे को तोड़ना

पाकिस्तान हमेशा यह धमकी देता था कि उसके पास एटम बम है, इसलिए भारत बड़ा एक्शन नहीं ले सकता. ऑपरेशन सिंदूर ने इस झांसे की हवा निकाल दी.

  • ब्लैकमेल का जवाब: भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने साफ कहा, 'भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों पर लंबी दूरी की मिसाइलों से सटीक हमला किया. हमने उनके परमाणु ब्लैकमेल को पूरी तरह खत्म कर दिया.'
  • हमने लड़ाई की लिमिट तय की: यह ऑपरेशन सीमित था और सिर्फ आतंकियों पर केंद्रित था. जब पाकिस्तान ने जवाबी हमले की कोशिश की, तो 10 मई को भारत ने उनके 8 बड़े एयरबेस पर हमला कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान चुप हो गया.
  • सीख: दुश्मन चाहे कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें करे, अगर इरादा मजबूत हो और सटीक वार किया जाए, तो उसका हर झांसा फेल हो जाता है.

4. स्वदेशी हथियारों ने कमाल कर दिखाया

इस जंग ने साबित कर दिया कि लड़ाई जीतने के लिए हमारे अपने हथियार कितने जरूरी हैं.

  • मेड इन इंडिया की जीत: ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश मिसाइल और ATAGS तोप जैसे ज्यादातर हथियार भारत में ही बने थे और इन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया.
  • आत्मनिर्भरता सिर्फ नारा नहीं: लेफ्टिनेंट जनरल घई ने बताया, 'आत्मनिर्भरता का मतलब है कि हम अपनी ताकत से लड़ें. अब भारत के 65 प्रतिशत से ज्यादा रक्षा उपकरण हमारे अपने देश में बनते हैं.'
  • सीख: दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय, अपने हथियार और तकनीक खुद बनाना सबसे बड़ी ताकत है. यही असली 'फोर्स मल्टीप्लायर' यानी ताकत बढ़ाने वाला मंत्र है.

5. भविष्य की लड़ाई ड्रोन, साइबर और अंतरिक्ष से लड़ी जाएगी

ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी बता दिया कि आने वाले समय की जंग सिर्फ बंदूक और टैंक से नहीं, बल्कि बहुत हाईटेक तरीके से लड़ी जाएगी.

  • ड्रोन का हमला और बचाव: लड़ाई के दौरान पाकिस्तान ने बड़ी तादाद में ड्रोन से हमले किए. इसके बाद भारत ने ड्रोन को मार गिराने वाली तकनीक और खुद के हमलावर ड्रोन बनाने पर बहुत जोर दिया.
  • साइबर वार और अफवाहों का बाजार: यह लड़ाई सिर्फ जमीन-हवा में नहीं, बल्कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी लड़ी गई. दुश्मन ने फर्जी खबरें फैलाने की पूरी कोशिश की, जिसे हमारी साइबर टीमों ने नाकाम किया.
  • मजबूत बंकरों की जरूरत: हमले के बाद अब सेना जमीन के अंदर कमांड सेंटर और 3D प्रिंटिंग से बने मजबूत बंकर बना रही है. साथ ही सीमावर्ती इलाकों में ऐसी सड़कें और हवाई पट्टियां बना रही है जो जंग के वक्त भी काम आ सकें.
  • सीख: लड़ाई जीतने के लिए सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी और दिमाग का इस्तेमाल करना सबसे जरूरी हो गया है.