लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने से जुड़े बिलों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के आगामी मॉनसून सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट सौंपने की संभावना नहीं है. सूत्रों के अनुसार भले ही लोकसभा ने पैनल का कार्यकाल मॉनसून सत्र के आखिरी दिन तक बढ़ा दिया हो, लेकिन समिति की बातचीत अभी पूरी नहीं हुई है.

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ऐसे में अब ये माना जा रहा है कि अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले समिति और समय मांगेंगी. यह देरी इसलिए भी अहम है क्योंकि ऐसी अटकलें हैं कि केंद्र सरकार मॉनसून सत्र के दौरान परिसीमन और एक देश, एक चुनाव जैसे अहम संवैधानिक संशोधन बिल पेश करना चाहती है. बता दें कि मॉनसून सत्र के जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है.

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बीजेपी सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली 39 सदस्यों की JPC अभी संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2024 की समीक्षा कर रही है, ताकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें. इस बिल को दिसंबर 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था और उसके बाद आगे की जांच के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया था.

मोदी सरकार का क्या है तर्क केंद्र की मोदी सरकार का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से बार-बार होने वाले चुनावों का आर्थिक बोझ कम होगा. आदर्श आचार संहिता के कारण होने वाली रुकावटें कम होंगी और सरकारें कामकाज पर बेहतर ढंग से ध्यान दे पाएंगी. हालांकि विपक्षी दलों ने संघीय ढांचे और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों पर इसके असर को लेकर चिंता जताई है.

सूत्रों के मुताबिक सरकार ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक समर्थन और कानूनी तेजी हासिल करने के मकसद से परिसीमन बिल (delimitation bill) को एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव से जोड़ने की संभावना पर विचार कर रही है. बता दें कि पिछले बजट सत्र में लोकसभा में एकजुट विपक्ष ने परिसीमन को महिला आरक्षण बिल से जोड़ते हुए संविधान संशोधन प्रस्ताव गिरा दिया था.

10 राज्यों का दौरा कर चुकी है जेपीसीमोदी सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन बिल को पास कराने की इच्छुक है. 540 सदस्यों वाले सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए NDA को 360 सीटों की जरूरत पड़ेगी. JPC बुधवार को स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के लिए दिल्ली विधानसभा का दौरा करेगी. कमेटी अब तक 10 राज्यों का दौरा कर चुकी है. कई अन्य राज्यों के साथ बातचीत अभी बाकी है. पैनल के चेयरमैन ने संकेत दिया है कि 2034 से पहले एक साथ चुनाव होने की संभावना कम है.

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