NEET पेपर लीक के खिलाफ NSUI का विरोध प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
NEET का पेपर लीक होने के खिलाफ NSUI ने जयपुर में विरोध मार्च निकाला. NSUI ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए NTA को पूरी तरह विफल बताया.

मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली NEET परीक्षा का पेपर लीक होने और छात्रों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ के विरोध में कांग्रेसके छात्र संगठन NSUI ने जयपुर में विरोध मार्च निकाला. यह विरोध मार्च गुर्जर की थड़ी से शुरू होकर त्रिवेणी चौराहे तक पहुंचा, जिसमें बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ता शामिल हुए.
प्रदर्शन का नेतृत्व NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने किया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “NTA बैन करो”, “पेपर लीक बंद करो” और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” जैसे नारे लगाए. छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों ने देशभर के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई के बजाय संसद की ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी से कराए जाने की मांग की. NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि पेपर लीक मामले में सबसे पहली गिरफ्तारी बीजेपी से जुड़े नेता की हुई है. ऐसे में सीबीआई जांच निष्पक्ष तरीके से होने की उम्मीद नहीं है. इसलिए इस मामले की जांच जेपीसी से कराई जानी चाहिए.
क्या बोले एनएसयूआई अध्यक्ष
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने अपने गृह जनपद जयपुर में हुए इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में भीड़ जुटा कर शक्ति प्रदर्शन भी किया. जाखड़ ने कहा कि यह आंदोलन उन लाखों छात्रों की आवाज है, जिनका भविष्य सरकार की नीतियों और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाने के बजाय छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
NTA को बैन करने की मांग
NSUI ने केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए NTA को पूरी तरह विफल बताया. संगठन ने मांग की है कि NTA को तत्काल प्रभाव से बैन किया जाए और शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें. इसके साथ ही NSUI ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं के परिवारों को 5 करोड़ रुपये मुआवजा, उनके भाई-बहनों को सरकारी नौकरी और मुफ्त शिक्षा देने की मांग भी उठाई.
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने चेतावनी दी कि जब तक NTA को बैन नहीं किया जाता और शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक छात्रों के अधिकारों और न्याय के लिए आंदोलन जारी रहेगा.
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