प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 28 जनवरी 2025 को मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट में PMLA की धाराओं के तहत 19 ब्रोकिंग संस्थाओं और उनके डायरेक्टर्स के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, जिन पर निवेशकों को नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) प्लेटफॉर्म पर व्यापार को लेकर लुभाने के लिए एनएसईएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करने का आरोप है.
ब्रोकिंग कंपनियों पर गुमराह करने का आरोप
बता दें कि ईडी ने अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. ब्रोकिंग कंपनियों के संबंध में ईडी की जांच से पता चला कि एनएसईएल के साथ रजिस्टर होने के बाद, उन्होंने एक्सचेंज के बारे में झूठे आश्वासन देकर अपने ग्राहकों को गुमराह किया और अवैध जोड़ी व्यापार (पेयर ट्रेड) के कॉन्ट्रेक्ट को बढ़ावा दिया, जिनकी अनुमति नहीं थी. ब्रोकिंग कंपनियों के साथ मिलीभगत कर एनएसईएल ने एक ऐसी प्रणाली स्थापित की, जो उनके ग्राहकों के लिए वेयरहाउस रिसिप्ट या फिस्कल कमोडिटी के संग्रह को बायपास कर देती थी.
ब्रोकिंग कंपनियों ने एनएसईएल के साथ एक आपराधिक साजिश रची, ताकि निवेशकों को भारी रिटर्न का वादा कर एनएसईएल प्लेटफॉर्म पर व्यापार करने के लिए लुभाया जा सके और निवेशकों को धोखा दिया जा सके. इन अवैध तरीकों से अर्जित ब्रोकरेज का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में किया गया, जिसका इस्तेमाल कर अपराध की आय (प्रोसिड्स ऑफ क्राइम) से कई लेयर बनाई गईं ताकि उन पैसों को बेदाग धन (अंटेंटेड फंड्स) के रूप में दिखाया जा सके.
34.74 करोड़ रुपये की ब्रोकरेज जब्त
ब्रोकिंग कंपनियों द्वारा गैरकानूनी तरीकों से अर्जित 34.74 करोड़ रुपये की ब्रोकरेज को भी पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जब्त कर लिया गया और इसकी पुष्टि एलडी एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी, पीएमएलए, नई दिल्ली द्वारा की गई है.
बता दें कि पीएमएलए, 2002 के तहत जांच के दौरान कुल 1.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई. 32 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर 3288.76 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है. इससे पहले, इस मामले में 94 आरोपियों के खिलाफ 6 चार्जशीट दायर की गई हैं, और आगे की जांच जारी है.
