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'सरासर गलत...', राहुल गांधी के UPI चार्ज को लेकर सवाल का सरकार ने दिया जवाब

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर UPI लेनदेन पर फीस वसूलने को लेकर सवाल उठाए थे और सरकार पर निशाना साधा था. अब NPCI ने उनके सभी दावों का जवाब दिया है.

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के UPI लेनदेन पर फीस वसूलने को लेकर लगाए आरोपों का NPCI ने जवाब दिया है. राहुल ने दावा किया था कि दो हजार से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया गया है. उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि इस तरह के लेनदेन की संख्या भले ही करीब 5 प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी करीब 65 फीसदी है.

इसके जवाब में NPCI ने साफ किया है कि UPI में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू सभी UPI लेन-देन की कुल वैल्यू का 70 फीसदी है. इस तरह के आपसी लेन-देन पर कोई भी चार्ज नहीं लगेगा, चाहे कितना भी पैसा ट्रांसफर किया जाए. इसके अलावा, मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR सभी दुकानदारों-व्यापारियों को मिलने वाले पेमेंट (P2M) पर पूरी तरह से नहीं थोपा जाएगा, बल्कि इसके लिए एक लिमिट तय की गई है. केवल 2000 से ज्यादा के मर्चेंट लेन-देन पर ही मामूली MDR चार्ज लिया जाएगा. 

NPCI के मुताबिक, अकेले अगस्त 2026 में UPI ने 24.5 बिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए हैं. जैसे-जैसे पेमेंट का यह पूरा स्ट्रक्चर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसके टेक्निकल नेटवर्क, नए बदलावों, साइबर सुरक्षा और कस्टमर सपोर्ट में निवेश करना बेहद जरूरी होता जा रहा है. MDR के इस नए नियम को इसी बड़े उद्देश्य के साथ देखा जाना चाहिए, ताकि भारत का डिजिटल पेमेंट ढांचा सुरक्षित, मजबूत, प्रतिस्पर्धी और देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के काबिल बना रहे.

दावा - राहुल गांधी ने सवाल किया था कि सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से? 

जवाब - इसके जवाब में सीधे तौर पर कहा गया है कि इस दावे का कोई आधार नहीं है कि नए MDR नियम के चलते दुकानदार अपने सामान की कीमतें बढ़ा देंगे. पुराने आंकड़े देखें तो व्यापारी पेमेंट लेने पर लगने वाले चार्ज को अपने बिजनेस का एक सामान्य खर्च मानते हैं. इसकी भरपाई ज्यादा बिक्री होने, ग्राहकों को मिलने वाली सुविधा, कैश संभालने के झंझट से मुक्ति और बिजनेस के जोखिम कम होने से आसानी से हो जाती है.

इसके अलावा, प्रस्तावित 0.4% का UPI MDR चार्ज केवल 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर ही लागू होगा. यह चार्ज दूसरे पेमेंट तरीकों जैसे क्रेडिट या डेबिट कार्ड के मुकाबले बहुत कम है. यह नियम बहुत कम लेन-देन पर लागू होता है और इसका रेट भी बेहद मामूली है, इसलिए दुकानदारों के पास सामान या सेवाओं के दाम बढ़ाने की कोई ठोस आर्थिक वजह नहीं है.

 राहुल गांधी का दावा - अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR नीति का विरोध करती रही हैं. अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है. यूएस ट्रेड डील की तरह ही कंप्रोमाइज्ड पीएम मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर कर रहे हैं.

NPCI का जवाब -  NPCI ने कहा कि यह दावा बिल्कुल गलत, बेबुनियाद और गुमराह करने वाला है कि यह नया फ्रेमवर्क किसी बाहरी दबाव या प्रभाव में आकर बनाया गया है. सरकार का पुराना रिकॉर्ड साफ तौर पर दिखाता है कि वह हमेशा से एक ऐसा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाने के लिए काम कर रही है जो खुला हो, जिसमें सब शामिल हो सकें और जो सस्ता हो. 

भारत ने 2016 में UPI की शुरुआत की थी और जनवरी 2020 से यह तय किया कि ग्राहकों और मर्चेंट्स के लिए UPI पेमेंट बिल्कुल फ्री रहे. सरकार के इन्हीं फैसलों की वजह से आज UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन पाया है. इस नए कदम का मकसद डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे UPI को लंबे समय तक चलाए रखना और इसमें नई तकनीकों को बढ़ावा देना है. ऐसा तब होगा जब ज्यादा से ज्यादा कंपनियों के बीच मुकाबला  कंपटीशन बढ़ेगा और वे अपना काम फैलाएंगी, लेकिन इसके लिए कंपनियों के पास कमाई का एक जरिया रेवेन्यू मॉडल होना भी जरूरी है ताकि वे खुद के दम पर टिक सकें.

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इसके अलावा, दुकानदारों से ली जाने वाली फीस से एक खास फंड बनाया जाएगा. इस फंड का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और पूरे देश में पेमेंट लेने वाले सिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जाएगा. यह फैसला दिखाता है कि सरकार बड़े दुकानदारों के ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई को वापस छोटे कारोबारियों की मदद करने और डिजिटल पेमेंट को बढ़ाने में ही लगाना चाहती है.

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शैलजाकांत मिश्रा एबीपी लाइव में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. इससे पहले उन्होंने कई मीडिया संस्थानों में काम किया है. उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है. पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से पूरी की. अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी हैं.

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