नोएडा की सड़कों पर मजदूरों से लेकर हाउस हेल्प तक... प्रोटेस्ट के लिए जिम्मेदार ट्रंप, क्या है असली कहानी?
इस प्रदर्शन की जिम्मेदार कंपनियां और उनका रवैया है, उतना ही जिम्मेदार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान को लेकर उनकी पाली गई जिद है. जिसने मजदूरों-हाउस हेल्प को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया.

Noida Protest: अभी तक तो नोएडा की सड़कों पर बस उन मजदूरों का ही प्रदर्शन दिखाई दे रहा था, जो कम वेतन और काम के अधिक घंटों को लेकर उग्र हो गए थे. लेकिन अब इस प्रदर्शन को समर्थन उन हाउस हेल्प का भी मिल गया है, जो हमारे-आपके घरों की साफ-सफाई से लेकर आपके झाड़ू-पोछा-बर्तन तक की जिम्मेदारी बखूबी निभाती आई हैं. कोई इन प्रदर्शनों को पाकिस्तान प्रायोजित बता रहा है, तो कोई इन प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक वजहों की तलाश में उलझा है.
हकीकत ये है कि इस प्रदर्शन के लिए जितनी जिम्मेदार ये कंपनियां और उनका रवैया है, उतने ही जिम्मेदार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान को लेकर उनकी पाली गई जिद है, जिसने इन मजदूरों और हाउस हेल्प के लिए महंगाई को उस चरम पर पहुंचा दिया है. जहां से इनका गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है.
यूं तो कंपनियों में मजदूरों का शोषण कोई नया नहीं है. उनका वेतन, उनके काम के घंटे, उनकी मजबूरी और परिवार पालने की जद्दोजहद इन मजदूरों को हमेशा से ही ऐसी ही परिस्थियों में काम करने के लिए मजबूर करती रही है. वो गुस्से को पालते हुए, उसे दबाए हुए कम वेतन पर भी काम कर रहे थे.
हरियाणा में बढ़ी मजदूरी बनी चिंगारी
साल-दर-साल वो ऐसे ही काम करते आ रहे थे. लेकिन हरियाणा में जब मजदूरी बढ़ गई और नोएडा के मजदूर पुरानी मजदूरी पर ही काम करते रहे तो वेतन में आया ये फर्क चिंगारी बन गया. ईरान-अमेरिका जंग की वजह से बढ़ी हुई तेल-गैस की कीमतों ने इस आग में घी डालने का काम किया. और फिर तो सिस्टम, असमानता और महंगाई के खिलाफ मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा.
जिनके घरों में पाइप से गैस सप्लाई हो रही है यानी कि जिनके पास पीएनजी है, उन्हें इस जंग से कोई खास असर सीधे तौर पर नहीं पड़ा है. जिनके पास एलपीजी गैस के कनेक्शन हैं, उन्हें भी देर-सवेर गैस तो मिल ही जा रही है. लेकिन जो मजदूर 10 हजार, 12 हजार, 15 हजार रुपये कमाने के लिए अपना घर-बार-परिवार छोड़कर नोएडा आए हैं. उन्होंने कभी गैस कनेक्शन लिया ही नहीं.
उनका काम चलता था उन छोटे वाले गैस सिलिंडर से, जो सरकारी दस्तावेज में कहीं दर्ज ही नहीं होते. इन सिलिंडरों में किलो के हिसाब से गैस भरती है. दो किलो-चार किलो, जिससे ये मजदूर हफ्ते दिन तक खाना बनाते हैं. मजदूरी मिलती है तो फिर से गैस भरती है.
होर्मुज का असर सबसे ज्यादा मजदूरों पर पड़ा
जब तक होर्मुज खुला था, इनके छोटे सिलिंडर 100 रुपये किलो के हिसाब से भर जाया करते थे. अपनी मजदूरी में से 100 रुपये खर्च करना इन्हें अखरता भी नहीं था. तो कम मजदूरी के बावजूद इनका काम चलता रहता था.
अब छोटे सिलिंडर भरने बंद हो गए हैं, क्योंकि गैस उतनी ही आ रही है, जितनी सरकारी दस्तावेज में जरूरत बताई जा रही है. कोई चोरी-छिपे छोटे सिलिंडर में गैस भर भी रहा है, तो वो चार-गुना पांच गुना दाम पर भर रहा है. यानी कि मजदूरों का गैस पर खर्च चार-पांच गुना बढ़ चुका है, जबकि मजदूरी अब भी वही है, जो पहले थी. नतीजा मजदूर सड़क पर उतर आए हैं.
तेल की कीमतों ने भी मजदूरों में पैदा किया असंतोष
रही -सही कसर तेल की बढ़ी कीमतों ने पूरी कर दी है, क्योंकि तेल की बढ़ी कीमत का सीधा असर चावल-दाल-सब्जी की कीमतों पर पड़ता है. तो अब मजदूरों का खाना महंगा हो गया है, जिसे खरीदना और वो भी भर पेट खरीदना उनके वेतन से हो नहीं पा रहा है. बाकी ऑटो का किराया हो या रोजमर्रा के दूसरे सामान, सब उनके लिए महंगा हो गया है. तो अब उनका गुस्सा अपनी कंपनियों पर फूटा है और वो वेतन बढ़ाने को लेकर अड़ गए हैं.
इस आग में घी का काम किया है हरियाणा सरकार के एक फैसले ने, जिसके तहत 1 अप्रैल से सरकार ने मजदूरों की मजदूरी में करीब 35 फीसदी बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है. 11 अप्रैल से जारी सरकारी अधिसूचना के जरिए हरियाणा सरकार ने फुल स्किल्ड श्रमिकों के वेतन में 5,036 रुपये तक बढ़ाए हैं. जो कुशल, अर्धकुशल और अकुशल मजदूर हैं, उनके वेतन में भी हजारों रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसकी वजह से हरियाणा के मजदूर बढ़ी हुई महंगाई में भी खुद के लिए राशन-पानी-तेल-गैस का इंतजाम कर ले रहे हैं.
गुस्सा प्रदर्शन की शक्ल में सड़कों पर उतरा
अब हरियाणा के मजदूरों की सैलरी बढ़ गई और नोएडा के मजदूर अब भी उसी पुरानी सैलरी पर काम कर रहे थे, तो गुस्सा भड़कना तो स्वाभाविक था. और यही गुस्सा प्रदर्शन की शक्ल में सड़कों पर उतर आया, जहां तोड़-फोड़ और आगजनी तक हो गई. जब इतना सब हो गया तब भी आम आदमी को कोई खास फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि इन प्रदर्शनों की वजह से थोड़ा-बहुत ट्रैफिक जाम था, जिसे पुलिस ने खुलवा दिया.
लेकिन अब इन मजदूरों के साथ वो हाउस हेल्प भी आ गई हैं, जो घरों में झाड़ू-पोछा-बर्तन करती थीं. उन्होंने भी साफ तौर पर कहा है कि हमारे वेतन में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए, हमारी भी छुट्टियां तय होनी चाहिए. और जब तक ऐसा नहीं होता, हम काम नहीं करेंगे.
मजदूरों के प्रदर्शन से फैक्ट्रियों का काम ठप, मेड के प्रदर्शन से हिला नोएडा
पहले मजदूरों के प्रदर्शन से फैक्ट्रियों में काम ठप और अब मेड के प्रदर्शन से पूरा नोएडा हिला हुआ है. सरकार अपने तईं कोशिश कर रही है कि कंपनियों से बात करके मजदूरों के वेतन में बढ़ोतरी की जाए, उनके हक-हुकूक के लिए कानून बनाया जाए. लेकिन इन प्रदर्शनों ने उन लोगों को आईना जरूर दिखा दिया है, जो कहते रहते थे कि अमेरिका-ईरान लड़ रहे तो हमें क्या. हकीकत ये है कि जंग चाहे जहां हो, जिसके भी बीच हो, हमको-आपको फर्क पड़ेगा ही पड़ेगा.
अभी मजदूरों की सैलरी कम है तो उनको फर्क पड़ा है, हाउस हेल्प की सैलरी कम है तो उनको फर्क पड़ा है, जब पेट्रोल-डीजल महंगा होगा तो हमको-आपको भी सीधा फर्क पड़ेगा. और इस फर्क को पड़ने में भी महज 20 दिन ही बचे हैं. क्योंकि 4 मई की तारीख बिल्कुल नजदीक है. इस तारीख के बाद पेट्रोल-डीज़ल के दाम में आग लग जाए तो किसी को हैरत नहीं होनी चाहिए.
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Source: IOCL


























