Russia-Ukraine War: नौसेना के वाइस एडमिरल का दावा, 'रूस में बन रहे भारतीय युद्धपोतों पर नहीं पड़ेगा असर'
Russia-Ukraine War: भारतीय नौसेना के सह-प्रमुख वाइस एडमिरल एस एन घोरमडे ने दावा किया है कि रूस-युक्रेन युद्ध का असर उन दो भारतीय युद्धपोतों के निर्माण पर नहीं होगा, जिसका निर्माण रूस में हो रहा है.

Russia-Ukraine War: बीते लंबे समय से जारी यूक्रेन युद्ध (Ukraine War) का असर भारतीय नौसेना (Indian Navy) के उन दोनों युद्धपोत (Warships) पर नहीं पड़ेगा जिनका निर्माण फिलहाल रूस (Russia) में चल रहा है. दोनों ही युद्धपोत समय से भारतीय नौसेना को मिल जाएंगे. भारतीय नौसेना के सह-प्रमुख वाइस एडमिरल एस एन घोरमडे (Vice Admiral SN Ghormade) ने यह दावा किया है.
सहनौसेनाध्यक्ष (वाइस चीफ), वाइस एडमिरल घोरमडे मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. भारतीय नौसेना इस महीने 18-19 तारीख को दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन कर रही हैं. इस सेमिनार को 'स्वावलंबन' नाम दिया गया है, जिसकी थीम 'भारतीय नौसेना में आत्मनिर्भरता' है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एबीपी न्यूज ने जब ये सवाल पूछा कि रूस में बन रहे भारतीय नौसेना के दो युद्धपोतों पर यूक्रेन युद्ध का कोई असर तो नहीं पड़ेगा तो वाइस एडमिरल ने साफ तौर से कहा कि हमारी (भारतीय नौसेना) की एक टीम लगातार रूस में मौजूद है जो इस निर्माण-कार्य को देख रही है. समयनुसार दोनों युद्धपोतों की डिलीवरी हो जाएगी.
आपको बता दें कि भारतीय नौसेना ने साल 2018 में रूस के साथ चार तलवार-क्लास फ्रीगेट (युद्धपोत) बनाने का करार किया था. इनमें से दो युद्धपोत का निर्माण कार्य गोवा शिपयार्ड में चल रहा है और दो का निर्माण-कार्य रूस के कैलीनग्रेड शिपयार्ड में चल रहा है. इनमें से एक को पिछले साल यानि 2021 में समंदर में लॉन्च किया गया था. इस जहाज को तूसील नाम दिया गया है जिसका अर्थ है सुरक्षा-कवच.
वाइस चीफ घोरमडे (Vice Admiral SN Ghormade) ने ये भी बताया कि 18-19 जुलाई को नौसेना (Indian Navy) जो राजधानी दिल्ली (Delhi) में स्वावलंबन नाम का सेमिनार करने जा रही है. इस सेमिनार के दौरान भारतीय नौसेना 75 ऐसी तकनीक और प्रोडेक्ट्स को स्वदेशी कंपनियों और स्टार्ट-अप्स को बनाने का चैलेंज देगी जिन्हें नौसेना खुद इस्तेमाल करेगी. ये 75 तकनीक देश की आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) यानि आजादी के 75 साल पूरा होने के उपलक्ष्य में तैयार किए जा रहे हैं. इन तकनीक का इस्तेमाल हिंद महासागर के मित्र-राष्ट्रों को इस्तेमाल करने के लिए भी दिया जाएगा. यहीं वजह है कि सेमिनार में मित्र-देशों के दूतावास और उच्चायोग में तैनात डिफेंस-अटैचे भी शामिल होंगे.
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Source: IOCL


























