नीतीश कटारा हत्या केस के दोषी विकास यादव को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है. कोर्ट ने विकास को अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए 8 मई तक जेल से बाहर रहने की इजाजत दी है. कोर्ट ने इस बात को भी आधार बनाया कि विकास 23 साल जेल में बिता चुका है.

गवाहों को अतिरिक्त सुरक्षासुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओका और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने विकास की मां उमेश यादव की एम्स में मेडिकल जांच का भी आदेश दिया. नीतीश कटारा की मां नीलम कटारा ने विकास की रिहाई को गवाहों के लिए खतरनाक बताते हुए विरोध किया था. कोर्ट ने सभी गवाहों को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने यह भी कहा है कि एम्स में मेडिकल जांच के लिए उमेश यादव को 2 दिन रखा जाए. इसके बाद उन्हें गाज़ियाबाद के यशोदा हॉस्पिटल में वापस भेज दिया जाए. ज़मानत पर रहने के दौरान विकास गाज़ियाबाद के राज नगर में रहेगा. उसे स्थानीय थाने में अपनी उपस्थिति की सूचना देनी होगी.

2002 का है मामलानीतीश कटारा की मित्रता बाहुबली डी पी यादव की बेटी भारती से थी. 16 फरवरी, 2002 की रात गाजियाबाद में एक शादी समारोह में भारती और नीतीश साथ थे. यह देख कर भारती का भाई विकास बेहद गुस्से में आ गया. उसने अपने चचेरे भाई विशाल के साथ मिलकर नीतीश को अगवा कर लिया. गाज़ियाबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर ले जाकर हथौड़े से उसकी हत्‍या कर दी.

दिल्ली की कोर्ट में हुई सुनवाईकुछ दिनों तक मुकदमा गाज़ियाबाद कोर्ट में चला. नीतीश की मां नीलम कटारा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि डीपी यादव के दबाव में सुनवाई सही तरीके से नहीं हो रही है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमा दिल्ली ट्रांसफर कर दिया.

25 साल की सज़ा मिली30 मई 2008 को निचली अदालत ने विकास, विशाल और सुखदेव पहलवान को उम्र कैद की सजा दी. 2 अप्रैल 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा. नीलम कटारा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दोषियों के लिए फांसी की मांग की. सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सज़ा तो नहीं दी, लेकिन उम्र कैद की सज़ा की मियाद तय कर दी. 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने विकास और विशाल को 25-25 साल और सुखदेव को 20 साल की सजा दी.

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