राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गुजरात में एक ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन केस में 5 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. ये लोग अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा सोशल मीडिया पर फैलाने के मामले में पकड़े गए थे.

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जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई है, उनके नाम मोहम्मद फर्दीन, कुरैशी सैफुल्ला, मोहम्मद फैक, जीशान अली और शमा परवीन हैं. इन सभी आरोपियों के खिलाफ UAPA, बीएनएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है.

NIA की जांच में क्या हुआ खुलासा?

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NIA की जांच में सामने आया कि ये लोग सोशल मीडिया पर वीडियो, फोटो और पोस्ट के जरिए AQIS की आइडियोलॉजी फैला रहे थे. इन सभी पोस्ट में भारत विरोधी बातें, हिंसा भड़काने वाली बातें और शरिया कानून और खिलाफत की बात की जाती थी.

जांच में ये भी पता चला कि ये लोग लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई भारत सरकार के खिलाफ युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे थे. उनका मकसद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ खींचना था.

गुजरात ATS ने बरामद किए थे हथियार, उपकरण और दस्तावेज

यह मामला पहले गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के पास था. ATS ने आरोपियों के पास से डिजिटल डिवाइस, महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई हथियार बरामद किए थे. इसमें एक सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, कारतूस और एक तलवार भी शामिल थी. वहीं, बाद में ये केस NIA को सौंप दिया गया.

NIA ने डिजिटल फूटप्रिंट्स को किया ट्रेस

NIA ने डिजिटल फूटप्रिंट ट्रेस किए और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाला, जिससे कई अन्य सबूत भी मिले. वहीं, पोस्ट, चैट और ग्रुप्स की मदद से NIA ने इनकी पूरी एक्टिविटी को ट्रैक किया. जांच में पुरानी दिल्ली के मोहम्मद फैक की भूमिका सबसे ज्यादा सामने आई. उस पर आरोप है कि उसने जिहाद, हिंसा और गज़वा-ए-हिंद जैसे कंटेंट शेयर किए. वो AQIS और दूसरे प्रतिबंधित संगठनों की विचारधारा को इंस्टाग्राम और एक स्पेशल ग्रुप के जरिए फैलाता था.

वहीं, मोहम्मद फरदीन, कुरैशी सैफुल्ला और जीशान अली भी सोशल मीडिया पर इसी तरह का कट्टरपंथी कंटेंट लाइक, शेयर और प्रमोट करते थे. ये लोग बराबर मिलकर ऐसा कंटेंट फैलाते थे, जिसमें खिलाफत, शरिया और सरकार के खिलाफ हिंसक बगावत की बात होती थी.

पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थी शमा परवीन

बेंगलुरु की शमा परवीन पर आरोप है कि वो AQIS के वीडियो शेयर करती थी और कट्टरपंथी ग्रुप्स में एक्टिव थी. NIA को उसके फोन में कट्टरपंथ से जुड़े वीडियो, किताबें और पाकिस्तान से जुड़े कॉन्टैक्ट नंबर भी मिले. जांच में सामने आया कि वो एक पाकिस्तानी नागरिक सुमेर अली से भी संपर्क में थी. NIA का कहना है मामले की जांच जारी है.

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