राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हैदराबाद के एक डॉक्टर समेत तीन आरोपियों के खिलाफ आईएसआईएस से जुड़ी बायोटेरर साजिश में चार्जशीट दाखिल कर दी है. एजेंसी के अनुसार, यह भारत में बायोटेरर की पहली बड़ी साजिश थी, जिसमें 'रिसिन' नामक जानलेवा जैविक विष का उपयोग कर सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर लोगों को जहर देने की योजना बनाई गई थी. 

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मुख्य आरोपी हैदराबाद निवासी डॉ. सैयद अहमद मोहियुद्दीन (35) पर चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद अपने घर को ही रिसिन बनाने की गुप्त प्रयोगशाला में बदलने का आरोप है. एनआईए का कहना है कि डॉ. मोहियुद्दीन को आईएसआईएस के विदेशी हैंडलरों ने 'दक्षिण एशिया का अमीर' बनाने का झांसा देकर इस साजिश में शामिल किया था.

यह मामला मूल रूप से नवंबर 2025 में गुजरात एटीएस की ओर से दर्ज किया गया था, जब डॉ. मोहियुद्दीन को अडालज टोल प्लाजा से उसकी कार से तीन अवैध पिस्तौल और चार लीटर अरंडी का तेल (जिससे रिसिन बनाया जाता है) बरामद होने के बाद गिरफ्तार किया गया था. इसी दिन एटीएस ने यूपी के रहने वाले आजाद और मोहम्मद सुहेल को भी गिरफ्तार कर लिया था. जांच में पता चला कि ये दोनों राजस्थान के हनुमानगढ़ से पैसे और हथियार लेकर आए थे.

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रिसिन अरंडी के बीज से बनने वाला एक अत्यंत घातक प्राकृतिक विष है, जिसे रासायनिक हथियार कन्वेंशन की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है. इसकी थोड़ी सी मात्रा भी मौत का कारण बन सकती है. एनआईए ने अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट में तीनों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की है. 

एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस साजिश में वंचित युवाओं को भर्ती करने, वित्तीय लेन-देन, रेकी और हथियारों की तस्करी जैसे कई अहम पहलू शामिल थे. अगर यह साजिश सफल हो गई होती, तो यह भारत के इतिहास में एक बड़ा बायोटेरर अटैक हो सकता था.

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 फिलहाल मामले में जांच जारी है और एनआईए विदेशी हैंडलरों का पता लगाने में जुटी है. डॉ. मोहियुद्दीन सहित तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और अब अदालत में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर सुनवाई होगी. इस मामले ने एक बार फिर भारत में आतंकी संगठनों द्वारा रासायनिक और जैविक हथियारों के बढ़ते खतरे को उजागर किया है.