पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी सुनवाई में पेश हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पौत्र चंद्र कुमार बोस ने सोमवार को कहा कि यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है लेकिन ठीक ढंग से नहीं की जा रही है. बोस ने 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़े थे. उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को उत्पीड़न जैसा करार दिया और दावा किया कि इसमें स्पष्टता की कमी है.
SIR के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है: चंद्रकुमार बोस
बोस ने बताया कि वह, उनकी पत्नी और बेटी 16 जनवरी को सुनवाई के लिए उपस्थित हुए जबकि उनके दो बेटे, जो विदेश में हैं. उन्होंने उन्हें अपनी ओर से पेश होने के लिए अधिकृत किया था. उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'एसआईआर महत्वपूर्ण है, लेकिन जिस तरह से इसका संचालन किया जा रहा है वह उचित नहीं है. एसआईआर के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है. मुझे इसे इतनी जल्दबाजी में आयोजित करने का कोई कारण समझ नहीं आता.'
'आवश्यक दस्तावेज जमा पर हमें सुनवाई के लिए बुलाया'
बोस ने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने अपने जनगणना प्रपत्रों के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे. उन्होंने आरोप लगाया, 'फिर भी हमें सुनवाई के लिए बुलाया गया. इसका कारण बेहद चौंकाने वाला था, क्योंकि मतदान अधिकारियों ने कहा कि डेटा को जोड़ने में समस्या थी. मैं इसलिए शिकायत नहीं कर रहा हूं कि मुझे एसआईआर के लिए बुलाया गया था, बल्कि इसलिए कर रहा हूं क्योंकि पूरी प्रक्रिया अव्यवस्थित और बिना किसी स्पष्टता के है.'
बोस ने दावा किया, 'यह सरासर उत्पीड़न के अलाव और कुछ नहीं है. उन्होंने प्रश्न किया,'पहले उन्होंने कहा कि मेरा नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिला और बाद में उन्हें मेरा नाम मिल गया. अब सभी वैध दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करने के बाद, वे दावा कर रहे हैं कि लिंकिंग में समस्या थी. अगर यह तकनीकी समस्या है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?'