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कुछ लोगों के लिए 15 करोड़ यूजर्स के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? टेलीग्राम पर रोक को लेकर HC ने केंद्र से पूछा

तुषार मेहता ने कहा कि रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल अक्सर आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है. यह बॉट इंफ्रास्ट्रक्चर दे सकता है जो बड़े पैमाने पर जानकारी प्रसारित कर सकता है.

नीट यूजी री-एग्जाम के लिए मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर 22 जून तक के लिए अस्थाई रोक लगाए जाने के फैसले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि सिर्फ इसलिए कि कुछ यूजर्स परीक्षा दे रहे हैं, मैसेजिंग ऐप के 15 करोड़ यूजर्स के अधिकारों को कैसे सीमित किया जा सकता है? गुरुवार (18 जून, 2026) को हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की.

नीट यूजी पेपर लीक मामले के बाद तीन मई को हुई परीक्षा रद्द कर दी गई थी और अब 21 जून को फिर से परीक्षा होनी है. ऐसे में सरकार ने परीक्षा से पहले टेलीग्राम के गलत इस्तेमाल के खतरे को देखते हुए अस्थाई रूप से 22 जून तक के लिए भारत में ऐप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है

केंद्र सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए दलील दी कि टेलीग्राम का गलत तत्व दुरुपयोग कर सकते हैं. टेलीग्राम का पक्ष सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता ने रखा जबकि केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं. 

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तकनीकी पहलुओं का संदर्भ देते हुए कहा कि एक टेलीग्राम अकाउंट से 40 तक ‘बॉट्स’ बनाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा, 'मैं बस एक उदाहरण देता हूं. टेलीग्राम में एक यूजर 40 बॉट्स बना सकता है, जबकि व्हाट्सऐप के मामले में, हर यूजर सिर्फ एक बॉट के लिए अधिकृत होता है. टेलीग्राम की संरचना कई बॉट बनाने को बढ़ावा देती है और फिर ये बॉट और भी ज्यादा संख्या में बन सकते हैं.'

एसजी तुषार मेहता ने कहा, 'बॉट्स मशीनें हैं, वे अपनी संख्या और बढ़ा सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीग्राम बॉट इंफ्रास्ट्रक्चर दे सकता है जो बड़े पैमाने पर जानकारी प्रसारित कर सकता है. यह सुविधा अनोखी है क्योंकि यह कम से कम मानवीय निगरानी के साथ जटिल नेटवर्क बनाने की सुविधा देती है.' उन्होंने कहा कि दूसरे प्लेटफॉर्म्स के साथ ऐसा नहीं है.

उन्होंने कोर्ट में कहा कि रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल अक्सर आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है और इसकी संरचना की वजह से अलग-अलग इलाकों में कार्यरत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

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उन्होंने कहा, 'सबसे तेजी से प्रसारित करने की सुविधा सिर्फ टेलीग्राम पर ही मिलती है. साथ ही, मान लीजिए कि अगर वे एक बॉट को हटा भी देते हैं, तो अलग-अलग नामों और पहचानों से दूसरे बॉट बनाए जा सकते हैं इसलिए, बॉट के खिलाफ किए गए उपायों से सिर्फ कुछ समय के लिए ही राहत मिलती है.' 

उन्होंने कहा कि फेसबुक और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ ऐसी समस्या नहीं है. उन्होंने कहा कि टेलीग्राम क्लाउड के जरिए काम करता है इसलिए अगर हम किसी चीज को ब्लॉक भी कर दें और कोई गड़बड़ी करें, तो भी कानून प्रवर्तन एजेंसी उस व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकती. हालांकि, कोर्ट ने केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया कि हम सिर्फ इसलिए कि नागरिकों का एक समूह परीक्षा दे रहा है, 15 करोड़ लोगों के अधिकारों को कैसे रोक सकते हैं.

विधि अधिकारी ने कहा कि इस मंच पर बड़ी संख्या में ग्रुप और चैनल चल रहे हैं और ऐसी सुविधाएं दूसरे मंचों पर देखने को नहीं मिलतीं. बेंच ने फिर सवाल किया, 'प्रश्न यह है कि क्या किसी और के अधिकारों की रक्षा के लिए आप किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों को रोक सकते हैं? इस बारे में अनुराधा भसीन मामले (के फैसले) में कानून की व्याख्या की गई है.'

विधि अधिकारी ने कहा कि अनुराधा भसीन मामले में सुप्रीम कोर्ट फैसला ऐप को बाधित करने से नहीं रोकता. हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और पक्षकारों से कहा कि अगर वह कुछ लिखित में जमा करना चाहते हैं, तो गुरुवार को ही शाम सात बजे तक ऐसा कर सकते हैं.

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Input By : PTI
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