लोकसभा में राजनीतिक समीकरणों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. सवाल यह है कि अगर विपक्षी दलों के कुछ सांसद टूटकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ आ जाते हैं, तो क्या केंद्र सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकती है? राजनीतिक गलियारों में इसी गणित पर मंथन चल रहा है.

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लोकसभा में क्या है दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा?लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 है. फिलहाल तीन सीटें खाली होने के कारण सदन की प्रभावी संख्या 540 है. ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 सीटों पर पहुंचता है. वर्तमान में NDA के पास करीब 292 सांसदों का समर्थन है, यानी दो-तिहाई बहुमत से वह अभी 68 सीट पीछे है.

बागी सांसद बदल सकते हैं तस्वीरराजनीतिक विश्लेषण के अनुसार यदि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसद NDA के साथ आते हैं, तो गठबंधन की संख्या 312 तक पहुंच सकती है. इसके बाद यदि कांग्रेस से नाराज बताए जा रहे द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के 22 सांसद भी समर्थन दे देते हैं, तो यह संख्या 334 हो जाएगी.

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शिवसेना UBT के सांसद भी बने फैक्टरइसके अलावा यदि शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से दो-तिहाई यानी 6 सांसद NDA के पक्ष में आते हैं, तो गठबंधन का आंकड़ा 340 तक पहुंच सकता है. इसके बाद यदि पिछली बार की तरह विपक्ष के 5 सांसद किसी अहम मतदान में NDA के पक्ष में वोट देते हैं, तो संख्या बढ़कर 345 हो जाएगी.

सिर्फ 15 सीटों का रह जाएगा फासलाइस स्थिति में NDA दो-तिहाई बहुमत से केवल 15 सीट दूर रह जाएगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निर्दलीय सांसदों का समर्थन, कुछ सदस्यों की अनुपस्थिति, विदेश दौरे, बीमारी या फिर अंतरात्मा की आवाज पर होने वाली क्रॉस वोटिंग जैसे कारक इस अंतर को और कम कर सकते हैं.

बड़े फैसलों के लिए अहम है संख्या बलसंविधान संशोधन जैसे बड़े और ऐतिहासिक फैसलों के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में आने वाले समय में विपक्षी दलों के भीतर की राजनीति और संभावित टूट-फूट केंद्र की सत्ता के लिए नई संभावनाएं पैदा कर सकती है. हालांकि फिलहाल यह पूरा गणित संभावनाओं और राजनीतिक अटकलों पर आधारित है, लेकिन इसके चलते दिल्ली की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ गई है.