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Explained: शिवसेना के 6 सासंद मिलने से NDA कितना मजबूत, दोनों सदनों में कितनी बढ़ेंगी सीटें? पढ़ें पूरा एनालिसिस

Shiv Sena UBT Crisis: लोकसभा में NDA की संख्या 319 तक पहुंचने से सरकार को अहम विधेयक पास कराने में मदद मिलेगी. राज्यसभा में भी NDA दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गया है.

महाराष्ट्र की सियासत में एक और बड़ा उलटफेर हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर अलग गुट बना लिया है और 19 जून को शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर वे एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो जाएंगे. यह टूट ‘ऑपरेशन टाइगर’ अभियान के तहत हुई, जिसे शिंदे गुट पिछले कई दिनों से चला रहा था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इन छह सांसदों के अलग गुट को मान्यता दे दी है. इस कदम से सत्तारूढ़ NDA को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बड़ा फायदा होने वाला है. आइए इसके पूरे गणित और राजनीतिक फायदों को समझते हैं...

लोकसभा में NDA की ताकत कितनी बढ़ जाएगी?

इस टूट से पहले NDA के पास लोकसभा में 293 सीटें थीं. इससे पहले ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने NDA का समर्थन करने का फैसला किया था, जिससे NDA की सीटें बढ़कर 313 हो गई थी. अब इसमें शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शामिल होने से NDA का आंकड़ा 319 तक पहुंच जाएगा.

हालांकि, लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (जो संविधान संशोधन के लिए जरूरी है) के लिए 363 सीटों की जरूरत होती है. 319 सीटों के साथ NDA अभी भी इस आंकड़े से 44 सीटें पीछे है. लेकिन यह संख्या NDA को संसद में काफी मजबूत स्थिति देगी और अहम विधेयक पास कराने में मदद करेगी.

राज्यसभा में NDA की स्थिति क्या है?  

राज्यसभा की बात करें तो NDA पहले से ही दो-तिहाई बहुमत के काफी करीब पहुंच चुका है. हाल ही में 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों में से 24 पर निर्विरोध चुनाव हुए, जिसमें NDA को बड़ा फायदा हुआ. 18 जून को 12 राज्यों की 26 सीटों पर होने वाले चुनाव, TMC और शिवसेना (UBT) में हुई टूट से NDA की राज्यसभा में स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है. राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना NDA के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे वह संविधान संशोधन जैसे अहम मुद्दों पर विपक्ष पर निर्भर नहीं रहेगा.

शिंदे गुट को क्या फायदा होगा?

इन छह सांसदों के शामिल होने के बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लोकसभा में सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो जाएगी. इसके साथ ही शिंदे गुट NDA के भीतर तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगा. वहीं, उद्धव ठाकरे के पास अब लोकसभा में सिर्फ तीन सांसद बचेंगे.

इस टूट से क्या-क्या फायदे होंगे?

इस टूट के 4 बड़े राजनीतिक फायदे हैं:

  • संविधान संशोधन में आसानी: लोकसभा और राज्यसभा दोनों में NDA की बढ़ती संख्या के साथ, सरकार के लिए परिसीमन विधेयक जैसे संविधान संशोधन विधेयक पास कराना आसान हो जाएगा. TMC ने इस साल की शुरुआत में परिसीमन विधेयक को हराने में अहम भूमिका निभाई थी.
  • विपक्ष का कमजोर होना: यह टूट विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के लिए एक बड़ा झटका है. महाराष्ट्र में विपक्ष कमजोर होगा और NDA को राज्य में राजनीतिक रूप से मजबूती मिलेगी.
  • कानूनी पेंच से बचाव: दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अगर किसी दल के दो-तिहाई सांसद अलग हो जाएं तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. शिवसेना (UBT) के नौ सांसदों में से छह (यानी दो-तिहाई) के अलग होने से ये सांसद अयोग्यता से बच गए हैं. इसलिए इन्होंने अलग गुट बनाकर स्पीकर से मान्यता मांगी.
  • शिंदे गुट का उभार: इस टूट के साथ ही एकनाथ शिंदे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ी ताकत हैं. शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर इन सांसदों का शामिल होना शिंदे के लिए एक बड़ी जीत है.

शिवसेना (UBT) की टूट का क्या है पूरा मामला?

ये छह सांसद मंगलवार रात चार्टर्ड विमान से दिल्ली पहुंचे और ओम बिरला से मुलाकात करके अलग गुट बनाने का पत्र सौंपा. स्पीकर ने इस गुट को मान्यता दे दी. इन सांसदों ने दिल्ली में एकनाथ शिंदे और उनके बेटे सांसद श्रीकांत शिंदे से भी मुलाकात की. वहीं, उद्धव गुट ने इन सांसदों को व्हिप जारी कर बैठक में बुलाया और स्पीकर से किसी भी बागी गुट को मान्यता न देने की अपील की, लेकिन उनकी यह अपील नाकाम रही.

शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों का शिंदे गुट में शामिल होना NDA के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत है. लोकसभा में NDA की संख्या 319 तक पहुंचने से सरकार को अहम विधेयक पास कराने में मदद मिलेगी. राज्यसभा में भी NDA दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गया है. इस टूट ने विपक्षी इंडिया गठबंधन को कमजोर किया है और एकनाथ शिंदे की राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया है. अब देखना यह होगा कि उद्धव ठाकरे इस बड़े झटके से कैसे उबरते हैं और क्या NDA आने वाले दिनों में और दलों को अपने साथ जोड़ पाता है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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