BJP की सहयोगी SKM ने संसद में किया छात्रों के प्रदर्शनों का बचाव, क्या कहा?
सिक्किम से दो बार सांसद रह चुके सुब्बा ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में हमारे युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जिस तरह से अपनी नाराजगी जताई है, उसे नकारात्मक रूप से नहीं लेना चाहिए.'

बीजेपी की एक सहयोगी पार्टी ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों पर कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देश में हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने सरकारों और सांसदों के िए भारत की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक जागरूकता का संकेत बताया है.
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान बोलते हुए एसकेएम के नेता इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि व्यापक प्रदर्शन उम्मीदवारों की बढ़ती हताशा को दर्शाते हैं. बता दें कि सरकार जो नया बिल लेकर आई है, उसका उद्देश्य कड़ी सजा देना, न्यूनतम कारावास की अवधि, जुर्माने की राशि बढ़ाना और फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करके तुरंत न्याय दिलाने का वादा करना है.
SKM ने संसद में किया विरोध प्रदर्शनों का बचाव
सिक्किम से दो बार सांसद रह चुके सुब्बा ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों में हमारे युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जिस तरह से अपनी नाराजगी जताई है, उसे नकारात्मक रूप से नहीं लेना चाहिए. मेरा मानना है कि व्यवस्था, सांसदों और सरकार, चाहे वह किसी भी पार्टी की हो, उनके लिए यह एक चेतावनी है कि हमें अपनी परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगा.'
SKM सांसद ने क्या कहा?
ये बिल लोकसभा में पास हो गया है. नीट-यूजी पेपर लीक के बाद हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है. कई राज्यों के छात्रों ने परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के लिए कड़ी सजा और सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में अधिक जवाबदेही की मांग की थी. सुब्बा ने कहा कि परीक्षाओं में नकल की घटनाएं छिटपुट घटनाओं से बढ़कर संगठित अपराध में तब्दील हो गई हैं, जिनमें वित्तीय लेन-देन भी शामिल हैं.
एसकेएम सांसद ने तर्क दिया कि ऐसे गिरोहों से धनी उम्मीदवारों को असमान रूप से लाभ होता है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र, जो अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं पर निर्भर रहते हैं, वंचित रह जाते हैं.
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लंबी जांच न्याय में देरी: SKM सांसद
उन्होंने कहा, 'जब परीक्षा पेपर लीक होने और अनुचित साधनों के कारण एक उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन करता है जबकि एक मेहनती छात्र पीछे रह जाता है, तो इससे न केवल व्यवस्था विफल होती है, बल्कि बच्चे का भविष्य भी खतरे में पड़ जाता है.' उन्होंने डेडलाइन में जांच की भी मांग की और कहा कि लंबी जांच अक्सर न्याय में देरी करती है.





















