मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला! ATF के लिए ₹10,000 करोड़, दिल्ली में पुराने वाहन हटेंगे, बिहार समेत कई राज्यों को सड़क परियोजनाओं की सौगात
Modi Cabinet: कैबिनेट ने ATF प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड, दिल्ली में पुराने ट्रक और बसों को बदलने और बिहार, तेलंगाना और मध्य प्रदेश की कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को हजारों करोड़ों की मंजूरी दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश के विमानन, सड़क परिवहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई. कैबिनेट ने विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंजूरी दी है. इसके अलावा दिल्ली में पुराने ट्रकों और बसों को हटाकर आधुनिक वाहनों से बदलने के लिए 5,041 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति दी गई है.
सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत और हवाई यात्रियों पर पड़ सकता था. इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने ATF प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड बनाने का फैसला किया है. इस फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, ताकि ईंधन की बढ़ती कीमतों का बोझ सीधे यात्रियों पर न पड़े और हवाई किरायों में अचानक बढ़ोतरी को रोका जा सके.
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कैबिनेट का दूसरा बड़ा
कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला दिल्ली में पुराने व्यावसायिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने से जुड़ा है. इसके लिए 5,041 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत पुराने ट्रकों और बसों को आधुनिक, कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से बदला जाएगा. सरकार ने इस योजना के तहत करीब 1.9 लाख पुराने ट्रकों और लगभग 16 हजार बसों को बदलने का लक्ष्य तय किया है. इसका उद्देश्य दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण कम करना, परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाना और ईंधन दक्षता को बढ़ाना है.
सरकार का गाड़ी के लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज छूट देने का फैसला
वाहन मालिकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने गाड़ी के लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज छूट देने का भी फैसला किया है. इससे पुराने वाहन मालिकों को नए वाहन खरीदने में आर्थिक मदद मिलेगी और योजना को तेजी से लागू करने में सहायता मिलेगी. कैबिनेट ने सड़क बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है. रामेश्वरम–कोणार्क–पारादीप तटीय राजमार्ग परियोजना के लिए 8,301 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 और राष्ट्रीय राजमार्ग-231 के खगड़िया–पूर्णिया खंड को चार लेन में विकसित करने के लिए 3,936 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.
फोर लेन रोड की मंजूरी
इसके अलावा तेलंगाना में राष्ट्रीय राजमार्ग-63 और राष्ट्रीय राजमार्ग-563 के अलग-अलग हिस्सों के फोर लेन निर्माण के लिए 7,597 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. वहीं मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-347बी के उन्नयन के लिए 4,415 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. सरकार का मानना है कि इन फैसलों से देश में परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, हवाई और सड़क संपर्क बेहतर होगा, प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और विभिन्न राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमतों को लेकर फैसला
नई व्यवस्था के तहत अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं तो सरकार की तरफ से बनाया गया यह फंड ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगा. वहीं जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होंगी, तो अतिरिक्त राशि वापस लेकर भारत सरकार के समेकित कोष में जमा की जाएगी. यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी सहायता राशि की वसूली और हिसाब पूरा नहीं हो जाता. यह योजना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानें संचालित करने वाली सभी इच्छुक भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी. इसके तहत एयरलाइंस को निश्चित कीमत पर ATF उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे ईंधन लागत का पहले से अनुमान लगाना आसान होगा और अचानक बढ़ने वाली कीमतों का जोखिम कम होगा.
एयरलाइंस को 3 साल तक क्या करना पड़ेगा
इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि इसमें शामिल एयरलाइंस को 3 साल तक केवल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से ही ATF खरीदना होगा. इसके लिए एयरलाइंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) किया जाएगा. इस व्यवस्था की हर वर्ष समीक्षा होगी या फिर तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार द्वारा दी गई पूरी अग्रिम राशि वापस नहीं मिल जाती. योजना के कॉर्डिनेट करने की निगरानी के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी. इसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और व्यय विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह समिति दावों की जांच, भुगतान, वसूली और पूरे सिस्टम की निगरानी करेगी. सभी वित्तीय लेनदेन और दावों का ऑडिट भी किया जाएगा. सरकार ने इस योजना को 36 महीने के लिए मंजूरी दी है. आवश्यकता पड़ने पर और सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति मिलने पर इसकी अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है.
भारतीय एयरलाइंस को वित्तीय स्थिरता मिलेगी- सरकार
सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारतीय एयरलाइंस को वित्तीय स्थिरता मिलेगी और उन्हें अपने परिचालन की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी. इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और यात्रियों पर बढ़ती ईंधन कीमतों का बोझ कम पड़ेगा. साथ ही हवाई किरायों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी. इस योजना का फायदा केवल एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहेगा. इससे एयरपोर्ट, ग्राउंड हैंडलिंग कंपनियां, विमान मरम्मत सेवाएं, ट्रैवल एजेंसियां, होटल उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है. लगातार हवाई सेवाएं जारी रहने से व्यापार, निवेश, पर्यटन और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलेगा.
पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से लिए गए फैसले
सरकार ने इस फैसले के पीछे पश्चिम एशिया में जारी संकट को प्रमुख कारण बताया है. संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमतों में भारी उछाल देखा गया. मार्च 2026 में ATF की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई. यानी कीमतों में करीब ढाई गुना वृद्धि हुई. ATF किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है. कीमतों में तेज बढ़ोतरी के समय यह हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इससे एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति पर भारी दबाव पड़ता है और यात्रियों के किराए में भी बढ़ोतरी होती है.
पाकिस्तान ने बंद किया अपना हवाई क्षेत्र
इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ अपना हवाई क्षेत्र बंद किए जाने के कारण भारतीय एयरलाइंस को यूरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है. इससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ गई हैं. परिणामस्वरूप कई लंबी दूरी के मार्गों पर किराए बढ़े हैं और कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या भी कम करनी पड़ी है. सरकार का मानना है कि नया ATF प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड इन चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा और देश की हवाई संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाए रखेगा.
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