महिलाओं का नमाज के लिए मस्जिद जाना अनिवार्य? सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अमानुल्लाह बोले- 'हदीस में ऐसा...'
शमशाद ने कहा कि एक तरफ मस्जिद में महिलाओं को जाने देने की मांग की जा रही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ही 'इस्माइल फारूकी' केस में कह चुका है कि नमाज के लिए मस्जिद का होना अनिवार्य नहीं है.

महिलाओं के मौलिक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता में संतुलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसका असर सबरीमाला, मस्ज़िद में महिलाओं की नमाज़ समेत कई मसलों पर पड़ेगा. इसलिए, तमाम लोग अपनी बात रख रहे हैं. एक मुस्लिम संस्था की ओर से वरिष्ठ वकील एम आर शमशाद ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं का नमाज़ के लिए मस्जिद जाना अनिवार्य नहीं है. उन्हें घर पर भी नमाज पढ़ने से बराबर पुण्य मिलता है. इस पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा, 'आप यह भी बताइए कि हदीस में ऐसा कहे जाने के पीछे क्या कारण बताया गया है? वह कारण यह है कि घर पर बच्चों की देखभाल के लिए भी कोई होना चाहिए.'
इस्लाम में मस्जिद की अनिवार्यता पर चर्चा
शमशाद ने कहा कि एक तरफ मस्जिद में महिलाओं को जाने देने की मांग की जा रही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ही 'इस्माइल फारूकी' केस में कह चुका है कि नमाज़ के लिए मस्जिद का होना अनिवार्य नहीं है. इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'लेकिन यह कहना तो वैसा ही है जैसे कोई कहे कि हिंदू धर्म में मंदिर का होना अनिवार्य नहीं है.'
इस पर शमशाद ने कहा, 'बिल्कुल हम यही दलील देते रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इस्माइल फारुकी फैसला सुप्रीम कोर्ट की कई और फैसलों का आधार बन चुका है.'
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क्या महिलाओं को मस्जिद आने की अनुमति?
लाइव लॉ के मुताबिक, शमशाद ने कहा कि इस्लाम के सभी संप्रदायों में इस बात पर सहमति है कि महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इस बात पर भी सहमति है कि नमाज अदा करने वाली मंडली में महिलाओं का होना अनिवार्य नहीं है. जस्टिस अमानुल्लाह ने शमशाद से कहा, 'आपको सभी के लिए यह स्पष्ट करना चाहिए कि शुरू से ही इस बात पर कोई विवाद नहीं है और यह खुद पैगंबर मोहम्मद से शुरू हुआ था.'
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर पूछा कि क्या महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश करने की अनुमति है? इसके जवाब में सीनियर वकील ने कहा, 'जी हां. खुद पैगंबर ने कहा है कि महिलाओं को मस्जिद आने से मत रोको. इस बारे में स्पष्टता है और जिन लोगों ने इस हदीस को कई ग्रंथों में दर्ज किया है, उन्होंने भी इस कथन को दर्ज किया है कि पैगंबर ने निर्देश दिया था कि महिलाओं को मस्जिद आने से मत रोको.'
(निपुण सहगल के इनपुट के साथ)
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