मुंबई: देश में कोरोना से प्रभावित लोगों के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आ रहे हैं. रोजाना कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है. ऐसे में धारावी जैसी झुग्गी बस्ती से कोरोना के मरीजों के मिलने से स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है. बीते हफ्ते भर में धारावी से तीन मामले सामने आये हैं.
धारावी से कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मिलने का सिलसिला मंगलवार से शुरू हुआ और लगातार तीन दिनों तक जारी रहा. मंगलवार को धारावी इलाके में झुग्गी Slum Rehabilitation Authority (SRA) की ओर से बनाई गई इमारत में रहने वाले एक शख्स की रिपोर्ट में उसे कोरोना पॉजिटिव पाया गया. ये शख्स इलाके में ही कपड़ों का कारोबार करता था. उसी शाम इस शख्स की मृत्यु भी हो गई.
अब तक ये पता नहीं चल सका है कि उसे कोरोना का संक्रमण कैसे हुआ. वो ना तो विदेश गया था और ना ही उसने दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मरकज में शिरकत की थी. बीमार पडने से 2-3 दिनों पहले तक वो इलाके में घूम फिर रहा था. अब प्रशासन ने उसके साथ रहने वाले पांच और लोगों को भी क्वॉरंटाइन कर दिया है और जिस इमारत में वो रहता था उसे सील कर दिया गया है.
दूसरा मामला अगले दिन बुधवार को आया. मुंबई महानगरपालिका में बतौर सफाई कर्मचारी काम करने वाला एक शख्स कोरोना पॉजिटिव पाया गया. ये शख्स धारावी की ही झुग्गी में रहता था. उसे इलाज के लिये मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया है और जहां वो रहता था वहां के निवासियों को क्वॉरंटाइन कर दिया गया है.
धारावी से तीसरा और सबसे ज्यादा गंभीर मामला एक डॉक्टर का है. ये डॉक्टर धारावी के मेन रोड पर ही अपना क्लीनिक चलाता था. गुरूवार को उसे कोरोना पॉजिटिव पाया गया. चिंताजनक बात ये है कि ज्यादा बीमार पड़ने से पहले तक ये अपने यहां मरीजों का इलाज कर रहा था. जाहिर है जो मरीज इस डॉक्टर के पास इलाज के लिये आ रहे थे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमजोर होगी. ऐसे में उनके भी कोरोना से संक्रमित होने का खतरा बढ गया है. अब उन मरीजों को खोजा जा रहा है जिनका कि इलाज इस डॉक्टर ने किया था.
धारावी का मामला डरावना इसलिये है क्योंकि ये इलाका एशिया की सबसे बडी झुग्गी बस्ती मानी जाती है. यहां आबादी का घनत्व बेहद ज्यादा है. दो वर्ग किलोमीटर के इलाके में सात लाख लोग रहते हैं. बस्ती में कई पतली संकरी गलियां हैं जिनमें मौजूद छोटी छोटी झोपडियों में पांच से 10 लोग रहते हैं. धारावी में बड़े पैमाने पर चमड़ा कारखाने हैं और उन कारखानों के मजदूर भी इन्हीं कच्चे घरों में रहते हैं जिनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है.
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