महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की नई तैयारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक सरकार एक नए विधेयक पर काम कर रही है, जिसमें लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव सामने आया है. इस प्रस्तावित ढांचे में करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने की बात कही जा रही है.

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2011 की जनगणना के आधार पर लागू होगी नई व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार, इस नई व्यवस्था को 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने की योजना पर विचार चल रहा है. बताया जा रहा है कि सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के साथ बैठक भी की है, ताकि व्यापक सहमति बनाई जा सके. हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सियासी गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई है.

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महिला आरक्षण कानून पहले ही संसद से पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने की शर्त नई जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़ी हुई थी. अब सरकार की इस पहल को उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार का मुद्दा केवल महिला प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राजनीतिक संतुलन और संसदीय ढांचे पर भी असर पड़ सकता है.

विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रक्रिया कब और कैसे लागू होगी, लेकिन सरकार इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. महिला मतदाताओं की बढ़ती भूमिका को देखते हुए आरक्षण का मुद्दा दलों के लिए अहम चुनावी एजेंडा बन सकता है. सामाजिक दृष्टि से महिला आरक्षण को राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जाता है. समर्थकों का कहना है कि इससे संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और नीति निर्माण में उनका दृष्टिकोण मजबूत होगा. वहीं, कुछ विपक्षी दलों ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ने पर सवाल भी उठाए हैं.

राजनीतिक रूप से यह मुद्दा आने वाली चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है. फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच इस प्रस्ताव को लेकर बातचीत जारी है. आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि लोकसभा सीटों के विस्तार और महिला आरक्षण की नई रूपरेखा देश की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगी. इतना तय है कि इस प्रस्ताव ने संसद से लेकर जनता तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है.