पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और युद्ध के हालात को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल सोमवार (23 मार्च, 2026) को पहले लोकसभा और आज मंगलवार (24 मार्च, 2026) को राज्यसभा में हालात और सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को लेकर जानकारी दी. अब सरकार ने इसको लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है. सरकार ने बुधवार (25 मार्च, 2026) को शाम 5 बजे संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें सभी दलों को पूरे मामले पर जानकारी दी जाएगी.

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सर्वदलीय बैठक को लेकर सरकार का क्या है उद्देश्य?

इस बैठक का उद्देश्य साफ है कि देश के अंदर राजनीतिक एकजुटता दिखाना और दुनिया को यह संदेश देना कि ऐसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत एकजुट है. बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई वरिष्ठ मंत्री और नेता शामिल होंगे. विपक्ष के भी सभी फ्लोर लीडर्स और कुछ अन्य नेता बैठक में शामिल होंगे. बैठक के जरिए संकट को लेकर सरकार विपक्ष को भरोसे में लेकर एक साझा रणनीति बनाना चाहती है.

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ईरान युद्ध को लेकर सदन में क्या बोले प्रधानमंत्री?

प्रधानमंत्री ने सदन में बोलते हुए कहा था कि स्थिति चिंताजनक है और अभी सुधार होने की संभावना भी कम नजर आती है. उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है, ऐसे में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है. साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी चुनौती बन सकता है. इसी सब स्थिति से निपटने के लिए सरकार की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं उसको लेकर बैठक में जानकारी दी जाएगी.

सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की दी जाएगी जानकारी

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने सदन में ये भी जानकारी दी कि सरकार ने 7 अलग-अलग एंपावर्ड ग्रुप भी बनाए हैं, जो LPG, क्रूड ऑयल, उर्वरक जैसे सामानों की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे, उसके साथ-साथ गल्फ एरिया में हमारे जितने नागरिक फंसे हुए हैं, उनको निकालने और उनकी सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम हैं, उसकी भी लगातार निगरानी की जा रही है. इन सब विषयों को लेकर सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक में सभी दलों को जानकारी दी जाएगी.

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