'हम दुनिया की आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन...', नार्वे की पत्रकार के सवाल पर भारत ने दिया करारा जवाब
भारत ने मानवाधिकारों की रक्षा-लोकतांत्रिक मूल्यों पर रुख बेहद कड़े शब्दों में साफ किया. भारत ने दो टूक कहा कि देश का लोकतंत्र और संविधान पूरी तरह मजबूत है, किसी को भी इस पर सवाल उठाने का हक नहीं है.

नॉर्वे की एक अखबार कमेंटेटर की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाइंट प्रेस बयान के दौरान किए गए विवादित रुकावट के बाद भारत ने मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अपना रुख बेहद कड़े शब्दों में साफ किया है. भारत ने दो टूक कहा कि देश का लोकतंत्र और संविधान पूरी तरह मजबूत है और किसी को भी इस पर सवाल उठाने का हक नहीं है.
नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोरे के साथ पीएम मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि अक्सर लोग भारत को लेकर 'ऐसा क्यों, वैसा क्यों' जैसे सवाल उठाते हैं, लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि 'भारत दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा (1/6) जरूर है, लेकिन वह दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं है.'
पहले दिन से महिलाओं को अधिकार
सिबी जॉर्ज ने कहा, भारत ने आजादी के पहले दिन से ही महिलाओं को समान अधिकार दिए हैं, जबकि कई विकसित देशों को ऐसा करने में दशकों लग गए. उन्होंने कहा, '1947 में हमने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया. हमें एक साथ आजादी मिली और पहले दिन से ही वोटिंग का अधिकार भी मिला. मैं ऐसे कई देशों को जानता हूं, जहां महिलाओं को वोटिंग का अधिकार मिलने में कई दशक लग गए. हम समानता और मानवाधिकारों में भरोसा करते हैं. हमें लोकतंत्र होने पर गर्व है.'
'अज्ञानी एनजीओ की रिपोर्ट पढ़कर सवाल न उठाएं'- विदेश सचिव
भारतीय मीडिया की ताकत का जिक्र करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा कि विदेशी लोग भारत के विशाल मीडिया इकोसिस्टम को समझे बिना ही बयानबाजी करने लगते हैं. उन्होंने कुछ चुनिंदा रिपोर्ट्स के आधार पर भारत को जज करने वालों को आड़े हाथों लिया.
उन्होंने कहा, 'लोग भारत के पैमाने और उसकी व्यापकता को नहीं समझते. अकेले दिल्ली में ही अंग्रेजी, हिंदी और कई अन्य भाषाओं के कम से कम 200 टीवी चैनल हैं, जहां रोज शाम को न जाने कितनी ब्रेकिंग न्यूज चलती हैं. लोग भारत की स्केल को नहीं जानते, वे कुछ अज्ञात और अज्ञानी एनजीओ (NGOs) की प्रकाशित एक या दो खबरें पढ़ लेते हैं और फिर यहांआकर सवाल पूछने लगते हैं.'
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब नॉर्वे की एक न्यूज कमेंटेटर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट शेयर की. उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने उनके सवाल का जवाब नहीं दिया. इसके साथ ही उन्होंने 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स' में भारत और नॉर्वे की रैंकिंग की तुलना करते हुए भारत पर निशाना साधा था, जिस पर भारत सरकार की ओर से यह तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया आई है.
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