राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के मुसलमानों के 'घर वापसी' वाले बयान पर घमासान मचा हुआ है.  जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भागवत के इस बयान का विरोध जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सांप्रदायिक और नफ़रत फैलाने वाली सोच की कड़ी विरोधी रही है और जब तक जिंदा रहेगी, इसका विरोध करती रहेगी.

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'..मानों उन्हीं ने मां का दूध पिया हो'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मदनी ने कहा, "जो 70 साल में कहने वाले पैदा नहीं हुए, वो बातें आज कही जा रही हैं कि 20 करोड़ मुस्लिमों की 'घर वापसी' कराई जाएगी. ऐसा लगता है कि मानों उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया है और किसी ने नहीं लेकिन सच यह है कि जो आवाज देश को तबाही, बर्बादी और आपस में दुश्मनी की तरफ ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती."

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'भड़काई जा रही नफरत की आग'

मदनी ने आगे कहा, 'देश में नफरत की आग भड़काई जा रही है, हिंसा का माहौल बना हुआ है. दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएं हो रही हैं. गाय के नाम पर बेगुनाह लोगों को मारा जा रहा है और इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है.' उन्होंने कहा, 'ये सब होने के बाद भी कुछ लोग यह ऐलान करते हैं कि देश में वही रहेगा जो उनकी विचारधारा को मानेगा. ऐसी सोच रखना संविधान का उल्लंघन है बल्कि यह देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी खतरनाक है.'

'मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए'

उन्होंने बयान में आगे कहा, 'धर्म के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जाएगा. सभी धर्म मानवता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, जो लोग धर्म का इस्तेमाल नफरत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं वह कभी अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते. कहा कि मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे. मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा. इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव  केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है.'