केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेषअदालत ने मणिपुर में जातीय संघर्ष के दौरान मई 2023 में तीन महिलाओं को निर्वस्त्र किए जाने और उनमें से दो के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले में छह आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं.

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इन छह आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और दंगा सहित 15 आरोप लगाए गए हैं. विशेष न्यायाधीश चत्रा भुकन गोगोई की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 जनवरी तय की है, और मणिपुर की जेल में बंद चार लोगों सहित सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से इस तारीख को अदालत के समक्ष पेश होना होगा.

अन्य दो आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं. विशेष न्यायालय ने दो जनवरी को पारित आदेश में आरोपी के खिलाफ 15 आरोप तय किए, जिसकी एक प्रति ‘पीटीआई-भाषा’ के पास उपलब्ध है.

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यह मामला चार मई 2023 को भीड़ के बाद भड़की हिंसा की घटना से संबंधित है, इसमें तीन पीड़ितों को निर्वस्त्र करने के बाद घुमाया गया था और उनमें से दो से कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, जबकि पीड़ितों में से एक के परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी गई थी.

काफी समय बाद एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद यह घटना प्रकाश में आई. आदेश में कहा गया है, '...यह अदालत, गवाहों के बयानों और दस्तावेजों सहित सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद, इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि सभी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं.'

इसके बाद प्रत्येक आरोपी व्यक्ति के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दंड प्रावधानों के आरोप तय किए गए.

आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपियों पर हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग, दंगा, घातक हथियार से लैस होना, मेइती और कुकी दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और आवासों को नष्ट करने जैसे आरोप लगाए गए हैं.

 

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