पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने और विधानसभा में 58 विधायकों के विद्रोह के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब अपने अस्तित्व बचाने की लड़ने लड़ रही है. इसे लेकर ममता बनर्जी ने कालीघाट में अपने आवास पर पार्टी के सांसदों और विधायकों के साथ बैठक की. बैठक के बाद पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि स्पीकर की ओर से नियुक्त किए गए विपक्ष के नेता (LoP) ऋतब्रत बनर्जी अवैध हैं और पार्टी इसके खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करेगी.

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LoP के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख करेगी टीएमसी

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, 'हमने फैसला किया है कि स्पीकर द्वारा नियुक्त विपक्ष के नेता (एलओपी) अवैध हैं. हम सोमवार (8 जून 2026) को इसके खिलाफ हाई कोर्ट जाएंगे. हम हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे. हम बीजेपी की ओर से टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या और उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने के तरीके के खिलाफ लड़ेंगे. हम सड़कों पर लड़ेंगे, हम अदालत में लड़ेंगे.'

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टीएमसी के उत्तराधिकारी को लेकर गहराया मतभेद

करीब 28 वर्षों से तृणमूल की आंतरिक व्यवस्था एक ही सिद्धांत पर टिकी रही- पार्टी और नेता ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं. लेकिन अब पहली बार यह समीकरण गंभीर चुनौती के घेरे में है. पार्टी के भीतर शुरू हुआ असंतोष अब विधानसभा से आगे बढ़कर सांसदों तक पहुंचने की आशंका पैदा कर रहा है. साथ ही नेतृत्व, उत्तराधिकार और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर भी गहरे मतभेद सामने आ रहे हैं. स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि पार्टी के प्रतीक ‘जोरा घास फूल’ (फूल और घास) पर नियंत्रण को लेकर भी भविष्य में विवाद की संभावना जताई जा रही है.

ऋतब्रत बनर्जी ने 60 विधायकों के समर्थन का दावा किया

ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष नामित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने किया था, जिन्होंने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे और जिसे बुधवार (3 जून 2026) को स्पीकर रथींद्र बोस ने स्वीकार कर लिया था. ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया था कि उनके पास 60 विधायक का सपोर्ट है और संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ेगी.

अभिषेक बनर्जी को मिला ममता का साथ

नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिलने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने साफ किया था कि पार्टी में अभिषेक बनर्जी की कोई भूमिका नहीं रहेगी. उन्होंने कहा था, 'उनके साथ हमारी पार्टी का कोई संबंध नहीं है. उनके साथ हमारी आवाम का भी दूर-दूर कोई संबंध नहीं है. अगर संबंध होता तो वे 26 दिनों तक छिपे नहीं रहते, बल्कि बाहर निकलकर आते. जैसे चोरों को पीटा जाता है वैसे उन्हें पीटा गया.' हालांकि ममता बनर्जी के घर पर हुई बैठक में अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे, जब एलओपी के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात हुई. इससे साफ है कि ममता बनर्जी पूरी तरह से अभिषेक बनर्जी के साथ हैं.

इसका मतलब यह है कि तृणमूल कांग्रेस का मूल गुट, जो अभी भी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा रखता है, अब केवल 20 विधायकों तक सिमट कर रह गया है. 4 मई को विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए गए थे, जिसमें तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस की सीटों की संख्या घटकर 80 रह गई थी.

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