पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हमने कभी ऐसा चुनाव आयोग नहीं देखा, जो इतना एरोगेंट और झूठा है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी के इशारे पर बंगाल में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. इस दौरान बंगाल की सीएम ने काले कपड़े पहनकर चुनाव आयोग का विरोध प्रदर्शन किया.

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CEC ज्ञानेश कुमार से मिलीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ SIR मुद्दे पर CEC ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की. ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी समस्याएं उठाने आए हैं, लेकिन उन्हें धमकी दी जा रही है. उन्होंने बंग भवन परिसर के बाहर भारी पुलिस तैनाती पर भी सवाल उठाया. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह पुलिस को नहीं, बल्कि ऊपर बैठे लोगों को दोषी ठहराती हैं.

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हमने इतना झूठा चुनाव आयोग नहीं देखा: ममता बनर्जी

CEC ज्ञानेश कुमार से मिलने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने कहा, 'मैं बहुत दुखी हूं. मैं बहुत लंबे समय से दिल्ली में राजनीति में शामिल रही हूं. मैं 4 बार मंत्री और 7 बार संसद रही हूं. मैंने ऐसा चुनाव आयुक्त कभी नहीं देखा जो इतना घमंडी हो, जो इतना झूठा हो.'

बंगाल की सीएम ने कहा, 'मैंने उनसे (मुख्य चुनाव आयुक्त) कहा कि मैं आपकी कुर्सी की इज्जत करती हूं क्योंकि कोई भी कुर्सी किसी के लिए स्थायी नहीं होती. एक दिन आपको जाना ही होगा. बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है. चुनाव लोकतंत्र में एक त्योहार होता है, लेकिन आपने 58 लाख लोगों के नाम हटा दिए और उन्हें अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया.'

58 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए: सीएम ममता

उन्होंने कहा, 'अगर आपको SIR करना ही था तो आपको चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर सही प्लानिंग के साथ करना चाहिए था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया. असम में आपकी बीजेपी सरकार है. आपने असम में SIR नहीं किया, लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में किया. आपने हमारे साथ क्या किया? आपने 58 लाख लोगों के नाम हटा दिए. यहां बहुत ज्यादा गड़बड़ी और गलत मैपिंग है.'

उन्होंने कहा, 'अगर हमें 2022 में SIR करना होता और हमसे हमारे पिता के बर्थ सर्टिफिकेट लाने को कहा जाता तो यह मुमकिन नहीं होता. पहले बच्चे घरों में पैदा होते थे, अस्पतालों में नहीं... अपने प्रधानमंत्री से पूछिए कि क्या उनके पास अपने माता-पिता के इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी सर्टिफिकेट हैं.'

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