पश्चिम बंगाल में टीएमसी में की टूट, चुनाव में हार समेत तमाम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर विधायकों, सांसदों और अन्य नेताओं की बैठक बुलाई. बैठक में शामिल होने के लिए TMC नेता अभिषेक बनर्जी, सोवनदेब चटर्जी, कोलकाता नगर निगम के महापौर पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले फिरहाद हकीम और अन्य नेता कालीघाट पहुंचे.
टीएमसी नेता का बागी विधायकों को चैलेंज
फिरहाद हकीम के मेयर पद से इस्तीफा देने पर TMC नेता मदन मित्रा ने कहा, 'यह दुख की बात है. वह मेरे पुराने दोस्त हैं. वह काम करने की स्थिति में नहीं थे. उन्हें इजाजत नहीं दी गई क्योंकि बीजेपी सरकार की तरफ से रुकावटें थीं.' पार्टी में राजनीतिक दरार पर उन्होंने कहा, 'इन लोगों (बागी) ने ममता बनर्जी के नाम पर चुनाव जीता था. 2.30 करोड़ लोगों ने वोट दिया था इसलिए अगर उनमें हिम्मत है, तो वे अपने MP-MLA पद से इस्तीफा दें, ममता बनर्जी और TMC का झंडा छोड़ दें और एक बार फिर जीतें.'
ममता बनर्जी के सामने चुनौती
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुए विभाजन के बाद पार्टी से और अधिक विधायकों के पाला बदलने को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. वह व्यक्तिगत रूप से बागी विधायकों से संपर्क साध रही हैं, जबकि वरिष्ठ नेता अन्य विधायकों को एकजुट रखने के लिए काम कर रहे हैं. करीब 28 वर्षों से तृणमूल की आंतरिक व्यवस्था एक ही सिद्धांत पर टिकी रही- पार्टी और नेता ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं, लेकिन अब पहली बार यह समीकरण गंभीर चुनौती के घेरे में है.
पार्टी के भीतर शुरू हुआ असंतोष अब विधानसभा से आगे बढ़कर सांसदों तक पहुंचने की आशंका पैदा कर रहा है. साथ ही नेतृत्व, उत्तराधिकार और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर भी गहरे मतभेद सामने आ रहे हैं. स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि पार्टी के प्रतीक ‘जोरा घास फूल’ (फूल और घास) पर नियंत्रण को लेकर भी भविष्य में विवाद की संभावना जताई जा रही है.
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