Rebel in TMC: 4 मई को पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में टीएमसी सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई. राज्य में बीजेपी सत्ता पर काबिज हुई है. चुनाव नतीजों के बाद से ममता की पार्टी के बुरे दिन भी शुरू हुए नजर आ रहे हैं. पार्टी के करीबन 58 विधायकों ने खुलकर बगावत कर दी है. साथ ही विपक्षी पार्टी बनने का दावा भी पेश कर दिया है. इससे पार्टी में दो फाड़ माने जा रहे हैं. 

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न्यूज एजेंसी एएनआई की मानें तो वहीं, बगावत न करने वाले लोगों में विधायक बीना मंडल, अशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब शामिल हैं. इनके अलावा छह सांसद भी शामिल है. इनमें डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हैं. TMC के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. यह सभी विधायक ममता बनर्जी की तरफ से बुलाई बैठक में नहीं पहुंचे थे.

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कौन है पार्टी से बगावत करने वाले रिताब्रत बनर्जी?

टीएमसी में हुई बगावत पार्टी से निकाले जा चुके विधायक रिताब्रत बनर्जी कर रहे हैं. उन्होंने स्पीकर से बैठक के बाद घोषणा की है कि उन्हें विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है. इससे पार्टी के अस्तित्तव पर संकट घिर गया है. ऐसे में पूरे तीन दशक बाद पार्टी में इस तरह की फूट देखी गई है. टीएमसी के 34 मुस्लिम विधायक हैं. इनमें लगभग आधे ने रिताब्रत बनर्जी का समर्थन किया है. रिताब्रत एक पूर्व छात्र नेता हैं. इन्हें पहले 2017 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) से निकाल दिया गया था. 2024 में TMC ने उन्हें राज्यसभा भेजा था.

रिताब्रत का कहना है कि ममता से अपनी मुख्य सलाहकार बनने का अनुरोध करेंगे. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उनके भतीजे अभिषेक से कोई बातचीत नहीं करेंगे. रिताब्रत का कहना है कि TMC लेजिस्लेटिव पार्टी 58 विधायकों की एक टीम है. यह TMC के चुनाव चिह्न पर जीते थे. विधानसभा में अब हम ही असली TMC हैं.  स्पीकर ने हमारा दावा स्वीकार कर लिया है. इधर, टीएमसी रिताब्रत के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में हैं. टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा है कि हमने तय किया है कि स्पीकर की तरफ से नियुक्त विपक्ष का नेता गैरकानूनी है. हम इसके खिलाफ कोर्ट जा रहे हैं. हम हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे. हम सड़कों पर लड़ेंगे, हम कोर्ट में लड़ेंगे.

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