मल्लिकार्जुन खड़गे खुद या बेटे के लिए CM पद...कर्नाटक में सियासी खींचतान के बीच बीजेपी IT हेड मालवीय का बड़ा आरोप
अमित मालवीय ने कहा कि ऐसा लगता है कि जब भी कांग्रेस आलाकमान उन्हें यह तय करने के लिए बुलाती है, कर्नाटक का मुख्यमंत्री कौन रहेगा, तो वे अक्सर दिल्ली के चक्कर लगाते हैं.

Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में लगातार खींचतान मची हुई है. कांग्रेस में भी अहम बैठक आयोजित की जा रही है. इसमें महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है. सीएम सिद्धारमैया और डेप्युटी सीएमडी शिव कुमार दोनों दिल्ली में मौजूद हैं. बैठक 11 बजे कांग्रेस मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर होगी. वहीं, इस पर अब बीजेपी ने चुटकी ली है. बीजेपी आईटी सेल अमित मालवीय ने कई बड़े आरोप लगाए हैं. उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और सिद्धारमैया को लेकर निशाना साधा है.
बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने कर्नाटक में चल रही सियासी उठापटक को लेकर एक बार फिर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि याद करना मुश्किल है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया या उनके डिप्टी डीके शिवकुमार आखिरी बार दिल्ली कब आए थे. जब उन्होंने किसी बड़े इन्वेस्टमेंट पर साइन किए हों, या किसी भी बड़े इनोवेशन और एआई पर किसी बड़े ईवेंट में हिस्सा लिया हो, जिससे वैश्विक पूंजी आकर्षित की जा सके.
मुख्यमंत्री पद के लिए लगाते हैं दिल्ली के चक्कर
अमित मालवीय ने कहा कि ऐसा लगता है कि जब भी कांग्रेस आलाकमान उन्हें यह तय करने के लिए बुलाती है, कर्नाटक का मुख्यमंत्री कौन रहेगा, तो वे अक्सर दिल्ली के चक्कर लगाते हैं.
मालवीय ने अपने एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक के शासन को साजिशों, असुरक्षा और सत्ता का अखाड़ा बना दिया. दुर्भाग्य से कर्नाटक की जनता को इसे 2028 तक झेलना पड़ेगा.
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मालवीय ने कहा कि इस स्थिति को और भी दिलचस्प बनाती है, कांग्रेस मल्लिकार्जुन खड़गे की भूमिका. ऐसे में अब यह चर्चा भी जोड़ पकड़ रही है कि खड़गे खुद मुख्यमंत्री पद चाहते हैं, या अपने बेटे के लिए इसे सुरक्षित करना चाहते हैं. इसका मकसद डॉ. जी परमेश्वर के उभार को रोकना है. वह एक और प्रमुख दलित नेता हैं. इन्हें अपेक्षाकृत साफ-सुथर, अनुभवी और एकेडमिक रूप से काबिल माना जाता है. इन्हें गांधी परिवार का संरक्षण हासिल नहीं है.
मालवीय ने पूछा- डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया क्या होगी?
मालवीय ने कहा कि अगर सिद्धारमैया को पद छोड़ना पड़ा, तो माना जाता है कि वे अपने उत्तराधिकारी के तौर पर परमेश्वर को ज्यादा सहजता से स्वीकार करेंगे. बड़ा सवाल है कि आखिर में डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया क्या होगी? क्या खड़गे कांग्रेस के भीतर किसी अन्य दल के नेता को स्वतंत्र रूप से उभरने देंगे? क्या राहुल गांधी ऐसे नेता को स्वीकार करेंगे, जिसने दिल्ली की दरबार राजनीति की बारीकियों को समझने में सालों न बिताएं हों?
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