Jewar Airport Connectivity: दिल्ली-NCR को बड़ी सौगात! अगले साल Jewar Airport से जुड़ेगा ये वाला एक्सप्रेसवे
DND-फरीदाबाद-सोहना एक्सप्रेसवे अगले साल जेवर एयरपोर्ट और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा. इससे दिल्ली-NCR में सफर तेज, ट्रैफिक कम और कनेक्टिविटी बेहतर होगी.

दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक जाम और लंबी यात्रा से परेशान लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. केंद्र सरकार तेजी से DND–फरीदाबाद–सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जो अगले साल तक सीधे Noida International Airport यानी जेवर एयरपोर्ट से जुड़ जाएगा.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर के लिए विश्वस्तरीय और भविष्य के अनुरूप ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक, प्रदूषण और ईंधन की खपत कम होगी.
करीब 59 किलोमीटर लंबा यह छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोहना को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ेगा. इसकी अनुमानित लागत 4,463 करोड़ रुपये है और इसे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है.
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे से भी कनेक्शन
इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से लोग बिना दिल्ली के भारी ट्रैफिक में फंसे सीधे जेवर एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे. परियोजना को Delhi-Mumbai Expressway और यमुना एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उत्तर भारत से आने वाला ट्रैफिक सीधे एयरपोर्ट तक पहुंच सकेगा.
सरकार इसके साथ 31 किलोमीटर लंबा एक अलग एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर भी बना रही है, जो DND–फरीदाबाद बाईपास को जेवर एयरपोर्ट से जोड़ेगा. इस परियोजना पर करीब 2,360 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
नई टेक्नोलॉजी से बन रहा है ये एक्सप्रेसवे
हाईवे परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसमें 140 मीटर लंबा नेटवर्क आर्च ब्रिज बनाया जा रहा है, जिसे भारत के सबसे आधुनिक स्टील ब्रिज स्ट्रक्चर में गिना जा रहा है. इसके अलावा प्रीकास्ट तकनीक, हाई-स्ट्रेंथ स्टील और एडवांस सेफ्टी सिस्टम का भी इस्तेमाल हो रहा है.
परियोजना की एक और खास बात इसका पर्यावरणीय मॉडल है. सड़क निर्माण में ओखला और गाजीपुर लैंडफिल से निकले करीब 2 लाख मीट्रिक टन बायो-माइंड मटेरियल का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे कूड़े के निपटारे के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा.
सरकार का दावा है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी और सफर पहले से कहीं ज्यादा तेज, आसान और सुगम हो जाएगा.

























