नई दिल्ली: महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है. इस फैसले के बाद महाराष्ट्र विधानसभा निलंबित अवस्था में रहेगी. जानकारों के मुताबिक महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन भले ही लागू हो गया हो लेकिन राष्ट्रपति शासन के जरिए विधानसभा को सिर्फ सस्पेंड/निलंबित रखा गया है. इसका मतलब यह हुआ कि जब भी कोई पार्टी बहुमत का दावा कर राज्यपाल को पूरी लिस्ट सौंपेगी तो उसके बाद उसको मौका दिया जा सकता है.

जाहिर है कि इसी को लेकर एनसीपी और कांग्रेस के बीच बातचीत भी चल रही है. खबर लिखे जाने तक मुंबई में एनसीपी प्रमुख शरद पवार से कांग्रेस के सीनियर नेताओं की बैठक जारी है. इस बैठक में इस बात पर फैसला होना है कि राज्य में शिवसेना को समर्थन देना है या नहीं. कांग्रेस का कहना है कि वो एनसीपी के साथ खड़ी है.

महाराष्ट्र: संविधान विशेषज्ञ ने कहा- राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश के अलावा भी था ये विकल्प

24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे. आज 11 नवंबर है. यानी नतीजे आने के 19 दिन बीतने के बावजूद भी राज्य में सरकार नहीं पाई. गृहमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव नतीजे आए 15 दिन बीत जाने के बावजूद भी राज्यपाल ने देखा कि कोई भी पार्टी सरकार बनाने में की स्थिति में नहीं है. इस स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन ही बेहतर विकल्प है.

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के सरकार की संभावना

राज्य में शिवसेना को एनसीपी और कांग्रेस अपना समर्थन दे सकते हैं. यही वो एक मात्र समीकरण है जिससे राज्य में सरकार बन सकती है. शिवसेना दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके पास 56 विधायक है. इसके साथ ही उसका दावा है कि सात अन्य विधायकों ने भी उन्हें समर्थन दिया हुआ है. इसके बाद एनसीपी के पास 54 और कांग्रेस के पास 44 विधायक है. तीनों मिलकर आराम से सरकार बना सकते हैं. लेकिन शिवसेना को समर्थन देने से पहले कांग्रेस अपने नफा-नुकसान के बारे में पूरी तरह से हिसाब कर लेना चाहती है.

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