युवा आबादी को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार (27 फरवरी, 2026) को कहा कि दुनिया अपनी चुनौतियों के समाधान के लिए देश की ओर देख रही है.
इंदौर के श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा, 'दुनिया के सारे देश अपनी चुनौतियों के समाधान के लिए भारत की ओर देख रहे हैं. इन देशों की निगाहें हमारे नौजवानों की जनसांख्यिकीय ताकत पर हैं.’'
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नौजवान भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं जिनका सामर्थ्य, आत्मविश्वास और नयी दृष्टि भारत को विकास के पथ पर ले जा रही है. उन्होंने कहा कि कई देशों की आबादी में युवाओं की तादाद घट रही है जिससे चुनौतियों से लड़ने का उनका सामर्थ्य भी कम हो रहा है.
ओम बिरला ने कहा, 'नवाचारों और नये अनुसंधानों के बूते वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भारत के नौजवानों का सामर्थ्य लगातार बढ़ रहा है. हमारे नौजवान स्टार्ट-अप के माध्यम से भारत के साथ ही दुनिया भर की चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं. इन चुनौतियों का समाधान हमारी जिम्मेदारी है.'
उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए देश के नौजवानों को और कठिन परिश्रम करते हुए अपना सामर्थ्य बढ़ाना होगा. ओम बिरला ने कहा, 'हमें अपने विश्वविद्यालयों के परिसरों में साझा प्रयास करते हुए खुद को बदलती तकनीकों के मुताबिक ढालना होगा ताकि हम वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए और सक्षम हो सकें.'
उन्होंने कहा कि वर्तमान कालखंड में भारत के बदलते भविष्य की नींव रखी जा रही है और युवाओं के नवाचार और नये अनुसंधान देश को प्रगति के पथ पर ले जा रहे हैं. लोकसभा अध्यक्ष ने दीक्षांत समारोह में शामिल सभी विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की भावी चुनौतियों से निपटने के लिए शुभेच्छाएं दीं और भरोसा जताया कि वे भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में हरसंभव योगदान करेंगे.
उन्होंने इंदौर में वैष्णव समुदाय के कपड़ा कारोबारियों की वर्ष 1884 में की गई पहल के आधार पर स्थापित विभिन्न शैक्षिक संस्थानों की तारीफ करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने देश की गुलामी के दौर में भी भारतीय संस्कृति और मूल्यों की रक्षा की.
बिरला ने कहा कि मुगलों और अंग्रेजों के राज के दौरान शासकों ने भारत की आध्यात्मिक संस्कृति, संस्कारों और विचारों को समाप्त करने के लक्ष्य से काम किया, लेकिन देश की सांस्कृतिक ऊर्जा के कारण उनके मंसूबे कामयाब न हो सके.
दीक्षांत समारोह में इंदौर के लोकसभा सांसद शंकर लालवानी और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी भी मौजूद थे. समारोह के दौरान स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के 2,008 विद्यार्थियों और 32 पीएचडी शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं. इस मौके पर संस्थान के 16 मेधावी विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के लिए स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया गया.
