Exclusive: ऑपरेशन सिंदूर के बाद मरम्मत के लायक भी नहीं बची लश्कर की इमारतें, मलबा साफ करने में लगे 23 दिन
Operation Sindoor: LeT के हेडक्वार्टर पर भारत का हमला इतना प्रभावी था कि ध्वस्त इमारतों को रिपेयर करना असंभव था. ऐसे में सितंबर 2025 में बुलडोजर से 23 दिनों तक इमारत को गिराया और मलबा हटाया गया.

- भारतीय वायुसेना ने 7 मई, 2025 को लश्कर के ठिकानों पर मिसाइल स्ट्राइक की।
- हवाई हमले से नष्ट हुए ठिकानों को ध्वस्त कर मलबा हटाया गया।
- पाकिस्तान सरकार ने 28 करोड़ रुपए पुनर्निर्माण के लिए दिए।
- लश्कर ने नए ठिकानों से आतंकी गतिविधियों को फिर शुरू किया।
एक साल पहले 7 मई, 2025 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लांच करते हुए सबसे पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके स्थित मुख्यालय मरकज तैयबा और उम्म-उल-कुरा पर भारतीय समयानुसार रात 1 बजकर 05 मिनट और 22 सेकंड पर मिसाइल से स्ट्राइक की थी. मिसाइल स्ट्राइक के बाद लश्कर-ए-तैयबा के दोनों परिसर तहस नहस हो गए थे.
आज एक साल के बाद एबीपी न्यूज के हाथ लगी तस्वीरों में दिखाई दे रहा है कि जहां एक समय पर आतंक के हेडक्वार्टर से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की प्लानिंग होती थी, वो जगह खाली बंजर जमीन में तब्दील हो चुकी है.
लश्कर ए तैयबा ने 23 दिनों तक ध्वस्त इमारत का हटाया मलबा
सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर पर भारतीय वायुसेना की मिसाइल स्ट्राइक इतनी प्रभावी थी कि दोनों ध्वस्त इमारतों को रिपेयर करना असंभव था, ऐसे में पिछले साल सितंबर 2025 में बुलडोजर की मदद से 23 दिनों तक ध्वस्त इमारत को गिराने और मलबे को हटाने का काम किया गया.
सरकार ने छह किश्तों में LeT को दी मदद
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा को अपनी इमारत के पुनर्निर्माण के लिए कुल 28 करोड़ पाकिस्तानी रुपये 6 किश्तों में ट्रांसफर किए थे, जिसमें पहली किश्त 14 अगस्त, 2025 को भेजी गई थी, लेकिन फिलहाल लश्कर-ए-तैयबा ने इस पैसे में से सिर्फ 11 लाख पाकिस्तानी रुपये का इस्तेमाल अपनी ध्वस्त इमारत को बुलडोजर से गिराने और मलबे को साफ करने के लिए किया है.
मरियम नवाज की इलीट पुलिस संभाल रही जैश के ठिकानों की सुरक्षा
साथ ही जिस तरह से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मरकज सुभानल्लाह के पूरे परिसर की सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तान की मरियम नवाज सरकार की पंजाब पुलिस की स्पेशल यूनिट इलीट पुलिस संभाल रही है, इसी तरह मुरीदके में भी सुरक्षा का काम मरियम नवाज की इलीट पुलिस के हाथों में ही है. जिसका गठन पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने और वीवीआईपी को सुरक्षा देने के लिए किया गया था.

हेडक्वार्टर और ऑपरेशनल सेंटर के ध्वस्त होने के बाद जैश ने बनाया दूसरा ठिकाना
सूत्रों के मुताबिक, तैयबा कॉलोनी में स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय मरकज तैयबा और ऑपरेशनल सेंटर उम्म-उल-कुरा के ध्वस्त होने के बाद पास में ही बनी जामिया-उद-दावा नए हेडक्वार्टर का काम कर रही है. साथ ही ऑपरेशनल सेंटर और आतंक की ट्रेनिंग के पहले चरण का ट्रेनिंग सेंटर कसूर में स्थित मरकज यरमूक को बनाया गया है.
इत्तेफाक से मुरीदके में स्थित जामिया-उद-दावा और कसूर के मरकज यरमूक दोनों को साल 2019 में तत्कालीन पाकिस्तान की सरकार ने नेशनल एक्शन प्लान के तहत अपने अधिकार में लेने की घोषणा की थी, लेकिन ये कार्रवाई सिर्फ कागज पर ही सीमित है, जहां जामिया-उद-दावा का संचालन आतंकी अब्दुल रहमान आबिद के पास है, तो मरकज यरमूक का संचालन आतंकी अब्दुल राशिद मोहसिन के पास है.
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