लद्दाख प्रशासन ने गुरुवार को एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश न तो कोई राज्य होगा और न ही विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश, बल्कि इसमें शासन का एक बिल्कुल नया मॉडल होगा, जिसके पास खास अधिकार होंगे. इस घोषणा ने लोगों में हैरानी, सदमा और उत्सुकता पैदा कर दी है, क्योंकि इस नए मॉडल के दूरगामी परिणाम होंगे.

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मीडिया से बात करते हुए लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने कहा कि लद्दाख के लिए एक "सुई जेनेरिस मॉडल" (एक लैटिन शब्द जिसका अर्थ है "अपनी तरह का" या "अनोखा") तैयार किया जाएगा, जो देश में कहीं और मौजूद नहीं है.

लद्दाख के लिए अनोखा प्रावधान

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यह भारत में अपनी तरह की पहली व्यवस्था होगी, जिसे विशेष रूप से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए बिना सीधे नौकरशाही शासन से बाहर लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. चूंकि केंद्र का कहना है कि लद्दाख में आंतरिक राजस्व कम होने के कारण पूर्ण राज्य का दर्जा देना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए 'सुई जेनेरिस मॉडल' संवैधानिक संशोधन के माध्यम से एक बीच का रास्ता सुझाता है.

मुख्य सचिव ने कहा, "यह निश्चित रूप से कोई राज्य नहीं होगा. यह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश भी नहीं होगा, बल्कि यह कोई अन्य निकाय होगा, जिसके पास ये अधिकार होंगे." उन्होंने कहा कि इसका नाम अभी तय नहीं हुआ है और इस पर चर्चा चल रही है. कुंद्रा, जो लद्दाख पर गठित उप-समिति का भी हिस्सा हैं, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के संदर्भ में छठी अनुसूची की कुछ सीमाएं थीं.

प्रशासन ने जोर देकर कहा कि यह व्यवस्था न तो कोई राज्य होगी और न ही विधानसभा वाला मानक केंद्र शासित प्रदेश (जैसे पुडुचेरी या दिल्ली). इसके बजाय, यह एक अलग, सीधे चुने गए केंद्र शासित प्रदेश-स्तरीय शासी निकाय का निर्माण करेगा.

प्रशासन के मुताबिक कहा गया कि "इस मॉडल की अपनी सीमाएं हैं. इसलिए, केंद्र सरकार आगे बढ़ने और 'कुछ और' देने को तैयार है. वह 'कुछ और' अनुच्छेद 371 के माध्यम से आ रहा है."

संविधान के आर्टिकल 371 में होगा संशोधन 

गृह मंत्रालय (MHA) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत एक बिल्कुल नया "अध्याय K" पेश करने का प्रस्ताव कर रहा है, जबकि अनुच्छेद 371 (A से J) ऐतिहासिक रूप से केवल राज्यों (जैसे नागालैंड, मिजोरम और असम) के लिए विशेष प्रावधान और सुरक्षा उपाय प्रदान करता है. अध्याय K इन सुरक्षा उपायों को एक केंद्र शासित प्रदेश पर अनोखे ढंग से लागू करेगा.

मुख्य सचिव ने बताया कि प्रस्तावित ढांचा संवैधानिक संशोधन के माध्यम से लद्दाख को प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी और जोर दिया कि सभी दलों के बीच राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी. बुधवार को हुई सब-कमेटी की बैठक में कुंद्रा ने बताया कि LAB और KDA के सदस्यों से प्रस्तावित UT-लेवल की संस्था और LAHDC की शक्तियों के बारे में कुछ सवाल पूछे गए थे.

उन्होंने कहा, "UT-लेवल की संस्था और LAHDC के बीच संबंधों को लेकर कुछ सवाल हैं- जैसे, कौन सी शक्तियां LAHDC के अधिकार क्षेत्र में होंगी और कौन सी शक्तियां UT-लेवल की संस्था के पास होंगी." उन्होंने आगे कहा कि कल संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत बनाई जाने वाली UT-लेवल की संस्था के बारे में चर्चा हुई थी. उनका कहना है कि "पिछली बैठक में, जो 3 जुलाई को हुई थी, यह तय किया गया था कि अनुच्छेद 371 के तहत एक UT-लेवल की संस्था बनाई जानी चाहिए और चर्चा इसी दिशा में आगे बढ़ी." उन्होंने यह भी बताया कि UT-लेवल की संस्था के लिए सीधे चुनाव कराने पर सहमति बनी थी.

कैसे लागू होगा "सुई जेनेरिस मॉडल" 

इस अनोखी संस्था को सीधे कार्यकारी, वित्तीय और विधायी शक्तियां दी जाएंगी ताकि स्थानीय स्तर पर चुने गए नेताओं की राजनीतिक आवाज़ मज़बूत हो. मुख्य सचिव सहित सभी UT नौकरशाह आखिरकार इस चुने हुए प्रमुख (संभवतः मुख्यमंत्री के बराबर की भूमिका) के कार्यकारी अधिकार के तहत काम करेंगे.

पूर्वोत्तर भारत में मौजूद मज़बूत स्थानीय सुरक्षा उपायों की तरह ही, इस खास संस्था के पास सांस्कृतिक और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील विषयों पर स्वतंत्र विधायी अधिकार होंगे. इनमें ज़मीन के अधिकार और संपत्ति का हस्तांतरण, संस्कृति और स्थानीय भाषाओं का संरक्षण, जंगल, पर्यावरण और अनुच्छेद 240 (UTs के लिए राष्ट्रपति के नियम) के तहत आरक्षित प्राकृतिक संसाधन जैसे मामले शामिल होंगे. इन मामलों पर केंद्र सरकार के कानून स्थानीय विधायी मंज़ूरी के बिना अपने-आप लागू नहीं होंगे.

उन्होंने कहा, "चर्चा का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव होने चाहिए या LAHDC के माध्यम से अप्रत्यक्ष चुनाव होने चाहिए. एपेक्स बॉडी और KDA के सभी सदस्यों की राय थी कि निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव होने चाहिए, और इस मुद्दे पर सहमति बनी."