लद्दाख के लोगों के लिए राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची और संवैधानिक गारंटी जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों की राजनीतिक लड़ाई भले ही केंद्र सरकार के साथ गतिरोध में फंसी हो, लेकिन अब लद्दाख के लोगों ने इस लड़ाई को एक अलग स्तर पर ले जाना शुरू कर दिया है. यह नई लड़ाई पर्यटन से जुड़े स्थानीय लोगों ने शुरू की है. वे ऐसे नियम और कानून बनाने की मांग कर रहे हैं, जिनसे छोटे होटल, होमस्टे और गेस्ट हाउस के मालिकाना हक और उन्हें चलाने का काम सिर्फ लद्दाख के स्थायी निवासियों तक ही सीमित रहे.
यह अनोखी मांग लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन के चरम पर होने के बीच उठी है. 2026 के पहले सात महीनों में 3.30 लाख से ज़्यादा पर्यटक आए, जो अब तक की सबसे ज़्यादा संख्या है, लेकिन इस कारोबार से जुड़े स्थानीय लोगों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. उन्हें डर है कि बड़े खिलाड़ी आकर बड़े होटल और होमस्टे खोलेंगे, जिससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है.
LRC एक जरूरी और व्यावहारिक अंतरिम उपाय बना रहेगा- लाचिक
बढ़ती चिंताओं के बीच लद्दाख के होटल मालिकों ने सरकार से मांग की है कि छोटे और मध्यम स्तर के होटल मालिकों को बचाने के लिए इस क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय के पंजीकरण के लिए 'लद्दाख रेजिडेंट सर्टिफिकेट' (LRC) को अनिवार्य किया जाए. होटल मालिक बाहरी लोगों के आने पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग कर रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर बाहरी ऑपरेटर इस क्षेत्र में आते हैं, तो स्थानीय स्तर पर चलाए जा रहे गेस्ट हाउस और होमस्टे को नुकसान हो सकता है.
इसे लेकर ऑल लद्दाख होटल एंड गेस्ट हाउस एसोसिएशन की अध्यक्ष रिग्जिन वांग्मो लाचिक ने कहा, ‘सरकार लद्दाख के लिए संवैधानिक और विधायी सुरक्षा उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें छठी अनुसूची और अनुच्छेद 371 से जुड़ी सुरक्षाएं शामिल हैं. जब तक ये सुरक्षा उपाय वास्तव में लागू नहीं हो जाते, तब तक पर्यटन में स्थानीय भागीदारी की रक्षा के लिए LRC एक जरूरी और व्यावहारिक अंतरिम उपाय बना रहेगा.’
क्या है एलआरसी, जिसकी मांग कर रहे लद्दाक पर्यटन से जुड़े लोग
अनिवार्य LRC की मांग पर शनिवार (8 अगस्त, 2026) को लेह में पर्यटन से जुड़े लोगों के संघ की कार्यकारी समिति की बैठक में चर्चा हुई. इस बैठक में नुब्रा, चांगथांग, शाम, जंस्कार और लद्दाख के अन्य हिस्सों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
लाचिक के अनुसार, बैठक में शामिल लोगों ने सहमति व्यक्त की कि यह मामला किसी एक शहर, जिले या व्यवसाय के प्रकार से कहीं आगे का है. उन्होंने माना कि स्थानीय भागीदारी के लिए सुरक्षा उपायों के बिना, अगली पीढ़ी के लिए अवसर लगातार कम हो सकते हैं, क्योंकि ज्यादा पैसे वाले बड़े बाहरी व्यवसाय इस क्षेत्र में आ सकते हैं. इस इलाके में टूरिज्म से जुड़े लोग पर्यटकों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता में हैं. लद्दाख में जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 3.30 लाख पर्यटक आए, जो 2025 में आए कुल 3.35 लाख पर्यटकों की संख्या के लगभग बराबर है.
लद्दाख प्रशासन टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की बना रहा योजना
लद्दाख प्रशासन इलाके में टूरिज्म से जुड़ी सुविधाओं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को बढ़ाने की योजना भी बना रहा है, जिससे स्थानीय कारोबारियों में जल्दबाजी की भावना और बढ़ गई है. रिपोर्ट के अनुसार, टूरिज्म लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और एक अनुमान के मुताबिक यह इलाके के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग आधे हिस्से का योगदान देता है.
रिपोर्ट में दिए गए सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि लद्दाख के सात जिलों में से अकेले लेह जिले में 317 होटल, 691 गेस्ट हाउस, 1,055 होमस्टे और 105 कैंप हैं. साथ ही, टूरिज्म से जुड़े लोगों ने पर्यटकों की संख्या को बेरोकटोक बढ़ने देने के खिलाफ चेतावनी दी है, क्योंकि यह आम टूरिस्ट डेस्टिनेशन के उलट, ज़्यादा ऊंचाई वाला, पानी की कमी वाला और पर्यावरण के लिहाज से नाजुक इलाका है, जिसकी क्षमता सीमित है.
लद्दाख में कैसे निर्देश चाहते हैं स्थानीय लोग
लाचिक ने कहा, ‘सिर्फ वे लोग जो लद्दाख में रहते हैं, इसके नाजुक पर्यावरण को समझते हैं और जिन्हें विकास के नतीजों के साथ जीना होगा, उन्हीं की टूरिज्म के विस्तार के तरीके पर सार्थक राय होनी चाहिए.’ होटल मालिकों के संगठन ने सरकार से एक ऐसा ढांचा तैयार करने की अपील की है, जो लद्दाख के खास हालात को ध्यान में रखे और यह सुनिश्चित करे कि टूरिज्म स्थानीय स्तर पर जुड़ा हो, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार हो, आर्थिक रूप से सबको साथ लेकर चलने वाला हो और इसमें स्थानीय लोग मुख्य भूमिका निभाएं.
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