एल. मुरुगन के केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश ने मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलों को फिर से हवा दे दी है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें मंत्री पद से मुक्त करने और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने की अनुमति देने का अनुरोध किया है. उन्होंने कहा कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से संगठनात्मक कार्यों में जुटना चाहते हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने कहा कि वह जमीनी राजनीति में लौटना चाहते हैं और तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. पीएम मोदी के हालिया तमिलनाडु दौरे का जिक्र करते हुए मुरुगन ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जनता के बीच जो स्नेह और उत्साह देखा, उससे उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि राज्य में बीजेपी और बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए अपना पूरा समय और ऊर्जा समर्पित करने की प्रतिबद्धता जताई.

ये केंद्रीय मंत्री भी दे चुके हैं इस्तीफा

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यह मंत्रिपरिषद से किसी राज्य मंत्री के इस्तीफे का तीसरा मामला है. इससे पहले जॉर्ज कुरियन ने जून और रवनीत सिंह बिट्टू ने जुलाई में इस्तीफा दिया था. बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था. मुरुगन सितंबर 2021 से राज्यसभा के सदस्य हैं और अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से उच्च सदन के लिए दोबारा निर्वाचित हुए थे. उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होगा. मंत्री ने कहा कि वह राज्यसभा की सदस्यता छोड़ना चाहते हैं.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भी हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था. हालांकि, वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बने हुए हैं. इसी तरह, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री बी एल वर्मा को भी राज्यसभा के चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया था. वह भी अपने पद पर बने हुए हैं. दो अन्य राज्य मंत्री पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा, जिन्हें हाल के महीनों में क्रमशः उत्तर प्रदेश और दिल्ली में बीजेपी की इकाइयों का अध्यक्ष बनाया गया था, दोनों जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. 

पीएम मोदी को लिखे पत्र में एल. मुरुगन ने कहा, ‘अब मैं जमीनी स्तर पर लौटना चाहता हूं, अपने ‘कार्यकर्ताओं’ के साथ खड़ा रहना चाहता हूं और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में बीजेपी को मजबूत करने के लिए पूरा समय समर्पित करना चाहता हूं. राष्ट्र पहले, पार्टी उसके बाद और स्वयं सबसे आखिर में.'