भारतीय सेना द्वारा रविवार (22 फरवरी) को किश्तवाड़ के छतरू इलाके के त्राशी के जंगल में एनकाउंटर में मारे गए जैश ए मोहम्मद के तीन आतंकी सैफुल्लाह, फरमान और हुरैरा में से सैफुल्लाह और फरमान की असली पहचान और पता खुफिया एजेंसी के हाथ लग गया है. एबीपी न्यूज़ के पास मौजूद एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक 22 फरवरी को मारे गए जैश ए मोहम्मद के टॉप कमांडर सैफुल्लाह का असली नाम अतीक उर रहमान है. साथ ही ये अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के एबटाबाद जिले के नाथियां गली इलाके के केरी सरफली गांव का रहने वाला था.

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2018 से अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह जैश ए मोहम्मद के साथ जुड़ा हुआ था, जहां सबसे पहले उसने बालाकोट में स्थित मदरसा तालीम उर कुरान से दौरा ए तरबियत की ट्रेनिंग ली और फिर अबोट्टाबाद की काला बाग-बाग़ान रोड पर स्थित जैश ए मोहम्मद की मस्जिद बाब अल इस्लाम में छोटे बच्चों को जिहाद के बारे में पढ़ाने लगा और हाफिज अतीक उर रहमान बन गया. साल 2021 में अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह को जम्मू कश्मीर में भेजने का जैश ए मोहम्मद ने प्लान बनाया और खैबर पख्तूनख्वाह की सामना पहाड़ी के पास हांगू स्थित ट्रेनिंग कैम्प में अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह की ट्रेनिंग कराई गई.

कुल 47 आतंकियों की कराई गई थी ट्रेनिंग अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह के बैच में कुल 47 आतंकियों की ट्रेनिंग कराई गई थी, जिसमें 4 फरवरी को मारा गया कोहाट का स्वरुद्दीन उर्फ आदिल ख़ान, चौधरी उस्मान उर्फ निक्कू और लुकमान बशीर उर्फ अबू माविया भी शामिल था. इसी बैच में पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर के रावलकोट का रहने वाला चौधरी मुताबिर हुसैन उर्फ फरमान भी शामिल था, जिसने अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह, स्वरुद्दीन उर्फ आदिल ख़ान, चौधरी उस्मान उर्फ निक्कू और लुकमान बशीर उर्फ अबू माविया के साथ ट्रेनिंग की थी.

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रावलकोट का चौधरी मुताबिर हुसैन उर्फ फरमान 22 फ़रवरी को किश्तवाड़ के त्राशी के जंगल में सैफुल्लाह के ग्रुप का मारा गया दूसरा आतंकी था. तीन भाइयों में सबसे बड़ा चौधरी मुताबिर हुसैन उर्फ फरमान साल 2019 में जैश ए मोहम्मद से जुड़ा था और इसे जैश ए मोहम्मद में भर्ती करने का काम जैश ए मोहम्मद के आतंकी कमांडर मसूद इलयास कश्मीरी ने किया था. मारे आतंकी चौधरी मुताबिर हुसैन का पिता चौधरी साबिर मसूद इलयास कश्मीरी का पुराना साथी है और ख़ुद भी हरकत ए मुजाहिद्दीन का आतंकी रह चुका है और हरकत के लिए अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत संघ के ख़िलाफ़ लड़ चुका है.

एनकाउंटर में कौन-कौन मारा गया22 फरवरी को पाकिस्तान के एबटाबाद के रहने वाले आतंकी अतीक उर रहमान उर्फ सैफुल्लाह और कश्मीर के पुंछ जिले के रावलकोट के रहने वाले आतंकी चौधरी मुताबिर हुसैन उर्फ फरमान को उसके एक और साथी जिसका छद्म नाम हुरैरा था, उसे भारतीय सुरक्षाबलों ने मौत के घाट उतार दिया था. सैफुल्लाह और फरमान छद्म नाम से जम्मू कश्मीर में एक्टिव इन दोनों आतंकियों के असली नाम पहचान सामने आने के बाद पाकिस्तान का आतंकी चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है. जहां एक तरफ़ पाकिस्तान दुनिया के सामने ख़ुद को आतंक से पीड़ित बताता है और दूसरी तरफ़ ख़ुद भारत में अपने नागरिकों को आतंकी बना कर भेजता है.

ISI का झूठा प्रोपेगंडा ध्वस्त आतंकी अतीक उर रहमान उर्फ सैफ़ुल्लाह के असली नाम और पते से जैश ए मोहम्मद और पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का झूठा प्रोपेगंडा भी ध्वस्त हो गया, जिसके तहत दोनों सैफ़ुल्लाह उर्फ अतीक उर रहमान के ग्रुप के एक्टिव होने के बाद दावा कर रहे थे कि कश्मीर में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से कश्मीरी युवा जुड़ रहे हैं क्योंकि ख़ुद जैश का सबसे बड़ा आतंकी कमांडर ही कश्मीरी है. 

ऐसे में एबटाबाद जिले के नाथियां गली इलाके के केरी सरफली गांव के रहने वाले आतंकी अतीक उर रहमान जो सैफ़ुल्लाह कोडनेम के साथ एक्टिव था. उसके मारे जाने और पहचान सार्वजनिक होने के बाद ये भी तय हो गया है कि भारत में आतंकी एक्सपोर्ट करने का काम पाकिस्तान, उसके पालतू आतंकी संगठन और पाकिस्तानी सेना और ISI ही करती है.

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