केरल पुलिस की साइबर विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और उसके एक हैंडल के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आरोप है कि AI से बना एक वीडियो प्रधानमंत्री और निर्वाचन आयोग को 'भ्रामक और मानहानि भरे' तरीके से दिखाते हुए वायरल हो गया है. पुलिस के अनुसार, इस कथित आपत्तिजनक कंटेंट की जानकारी उन्हें आधिकारिक माध्यमों के जरिए मिली, जिसमें चुनाव आयोग भी शामिल है.
जनता को गुमराह करने की आशंकाजांच के बाद पुलिस ने पाया कि यह वीडियो लोगों को गुमराह कर सकता है और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है. पुलिस का कहना है कि इस तरह का कंटेंट स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, इसलिए मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की गई है.
पुलिस ने जांच शुरू कीपुलिस ने कहा कि बुधवार देर रात तिरुवनंतपुरम शहर के साइबर अपराध थाने में मामला दर्ज किया गया तथा दोषी का पता लगाने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 336 (जालसाजी), 353 (सार्वजनिक अशांति को बढ़ावा देने वाले बयान), 3(5) (साझा इरादा) और 174 (चुनाव में अनुचित प्रभाव या किसी अन्य के रूप में खुद को पेश करने के मामले में दंड) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी (पहचान की चोरी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. FIR में किन बातों का जिक्र?FIR के अनुसार, एक मिनट 17 सेकंड का वीडियो समाज में दंगे भड़काने के इरादे से सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट किया गया था और ‘एक्स’ ने सामग्री को हटाने के संबंध में अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद उसे प्रसारित होने दिया था. पुलिस ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मध्यस्थ मंच को आवश्यक कानूनी नोटिस जारी किए गए और गैरकानूनी सामग्री को शीघ्रता से हटाने का निर्देश दिया गया. पुलिस ने कहा कि आदर्श आचार संहिता और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार, केरल पुलिस की साइबर ऑपरेशन शाखा ने वीडियो के आगे प्रसार को रोकने के लिए तत्काल उपाय शुरू किए. पुलिस ने लोगों से भ्रामक जानकारी साझा न करने की अपील कीपुलिस ने कहा, 'आम जनता को उचित सावधानी बरतने और विशेष रूप से चुनाव अवधि के दौरान अपुष्ट या भ्रामक सामग्री बनाने, साझा करने या फैलाने से बचने की सलाह दी जाती है.' पुलिस ने यह भी कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को बाधित करने या प्रभावित करने का प्रयास करने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ त्वरित, कानूनी और निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी. (पीटीआई भाषा इनपुट्स के साथ)
