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महिलाओं पर कमेंट को लेकर केरल CM पर भड़का सुन्नी मुस्लिम संगठन, दे दिया अल्टीमेटम

केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और इस्लामी विद्वान कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के बीच महिलाओं को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है.

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और इस्लामी विद्वान कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के बीच महिलाओं को लेकर दिए गए बयान पर शुरू हुआ विवाद अब और बढ़ गया है. सतीशन की आलोचना के कुछ दिनों बाद समस्ता (समस्ता, केरला सुन्नी जमीअतुल उलेमा केरल में मुस्लिम विद्वानों (उलेमा) का सबसे प्रमुख और प्रभावशाली संगठन है) ईके गुट के मुखपत्र ‘सुप्रभातम’ ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है. 

अखबार ने अपने संपादकीय में सतीशन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने कांथापुरम के बयान को सही संदर्भ में समझे बिना उसकी आलोचना की. संपादकीय में मुख्यमंत्री के महिलाओं के अधिकारों, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश, मुनंबम जमीन विवाद और पीएम श्री योजना को लेकर उनके रुख पर भी सवाल उठाए गए हैं.

‘Speak with Decency’ संपादकीय में मुख्यमंत्री पर निशाना

‘सुप्रभातम’ ने “Speak with Decency” शीर्षक से प्रकाशित संपादकीय में सतीशन की कांथापुरम के बयान की व्याख्या की तुलना उस व्यक्ति से की, जो हाथी के सिर्फ एक हिस्से को छूकर पूरे हाथी का वर्णन करता है. अखबार का कहना है कि मुख्यमंत्री का रुख मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों की ओर से दिए गए एकतरफा विवरण से प्रभावित नजर आता है. संपादकीय में तर्क दिया गया कि कांथापुरम ने अपनी धार्मिक मान्यता विश्वास रखने वाले लोगों के बीच रखी थी. ऐसे में सतीशन ने इस्लामी दृष्टिकोण को ठीक से समझे बिना उनकी आलोचना की.

यह भी पढ़िएः गोवा दौरे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, BJP क्या कर रही प्लानिंग?

महिलाओं के अधिकारों पर सतीशन की ‘निरंतरता’ पर सवाल

‘सुप्रभातम’ ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर मुख्यमंत्री के रुख पर भी सवाल उठाया. अखबार ने याद दिलाया कि सतीशन ने सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया था, लेकिन अब वह महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर विस्तार से बात कर रहे हैं. संपादकीय ने इसे सतीशन के रुख में विरोधाभास बताते हुए उनकी राजनीतिक और वैचारिक निरंतरता पर सवाल खड़े किए.

मुनंबम जमीन विवाद पर भी घेरा

मुख्यमंत्री के मुनंबम जमीन विवाद को लेकर रुख पर भी संपादकीय में निशाना साधा गया. अखबार ने कहा कि सतीशन ने घोषणा की थी कि विवादित जमीन वक्फ की संपत्ति नहीं है, जबकि इस मामले की सुनवाई एक ट्रिब्यूनल में चल रही थी. ‘सुप्रभातम’ ने इस मुद्दे को भी मुख्यमंत्री के दोहरे मापदंड से जोड़ते हुए उनके रुख पर सवाल उठाए.

पीएम श्री योजना पर भी सवाल

संपादकीय में पीएम श्री योजना को लेकर सतीशन के बयान की भी आलोचना की गई. सतीशन ने कहा था कि समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद सरकार इस योजना से पीछे नहीं हट सकती. हालांकि, उनके नेतृत्व वाली सरकार ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक उपसमिति गठित की थी. अखबार ने इसी विरोधाभास को आधार बनाकर मुख्यमंत्री की स्थिति पर सवाल उठाया.

रमेश चेन्निथला की तुलना कर साधा निशाना

‘सुप्रभातम’ का संपादकीय मुख्यमंत्री सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के बीच तुलना करता हुआ भी नजर आया. अखबार ने कहा कि अगर कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में केसी वेणुगोपाल का नाम चर्चा में नहीं आया होता तो मुकाबला सतीशन और चेन्निथला के बीच होता. संपादकीय में संकेत दिया गया कि अधिक समायोजनकारी स्वभाव के कारण रमेश चेन्निथला को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना जाता.

‘75 पेज रोज पढ़ते हैं सतीशन, लेकिन उपन्यास नहीं लिखा’

मुख्यमंत्री के पढ़ने की आदतों को लेकर उनके लगातार दिए जाने वाले संदर्भ पर भी संपादकीय ने कटाक्ष किया. अखबार ने लिखा कि सतीशन रोजाना 75 पेज पढ़ते हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने कोई उपन्यास नहीं लिखा है. वहीं रमेश चेन्निथला ने यह नहीं बताया कि वह रोज कितने पेज पढ़ते हैं, लेकिन उन्होंने एक उपन्यास जरूर लिखा है. संपादकीय ने यह भी टिप्पणी की कि कई बार विधायक रहने और यहां तक कि यूडीएफ के सत्ता में रहने के दौरान भी सरकार से बाहर रहने वाले किसी राजनेता का उदाहरण दुर्लभ है. इसे सतीशन के मंत्री पद के अनुभव की कमी पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है.

कांथापुरम के बयान से शुरू हुआ था विवाद

पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने कोच्चि में आयोजित एक इस्लामी सम्मेलन में महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने को लेकर टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि ऐसा करने से बड़ा विनाश हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसी स्थिति को रोकने के लिए इस्लाम में पर्दे की व्यवस्था निर्धारित की गई है. कांथापुरम के इस बयान का मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कड़ा विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि यह टिप्पणी इस्लामी इतिहास के साथ-साथ आधुनिक केरल के प्रगतिशील मूल्यों के भी विपरीत है.

सतीशन ने खदीजा और आयशा का दिया था उदाहरण

मुख्यमंत्री ने मुस्लिम महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी के उदाहरण देते हुए पैगंबर मोहम्मद की पहली पत्नी खदीजा का जिक्र किया था, जो एक प्रमुख कारोबारी महिला थीं. उन्होंने आयशा का भी उदाहरण दिया था, जिन्होंने ऊंटों की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. सतीशन ने कहा था कि 21वीं सदी में इस तरह के 19वीं सदी के विचारों का कड़ा विरोध किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि प्रगतिशील सोच यह है कि महिलाओं को केवल घरों तक सीमित रहने के लिए नहीं बनाया गया है.

मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व के एक वर्ग ने जताई आपत्ति

सतीशन की इन टिप्पणियों के बाद मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व के कुछ वर्गों की ओर से उनकी आलोचना शुरू हो गई. कांथापुरम के नेतृत्व वाले गुट के एक प्रतिनिधिमंडल ने बाद में मुख्यमंत्री से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने सतीशन पर इस्लामी इतिहास को गलत तरीके से समझने और उसकी गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया. अब समस्ता ईके गुट के मुखपत्र ‘सुप्रभातम’ के संपादकीय के जरिए मुख्यमंत्री पर किया गया यह हमला विवाद को और तेज करता नजर आ रहा है.

आशुतोष प्रताप सिंह ABP न्यूज़ डिजिटल की न्यूज़ टीम का हिस्सा हैं. नेशनल और इंटरनेशनल खबरें करते हैं. ब्रेकिंग न्यूज पर फोकस रखते हैं. राजनीति, चुनाव, खेल, राष्ट्रीय घटनाक्रम और सामाजिक मुद्दों पर गहरी समझ रखते हैं. करीब 8 वर्षों का पत्रकारिता में अनुभव है. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से ताल्लुक रखने वाले आशुतोष ने जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन से रेडियो एवं टीवी जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है.

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