कर्नाटक की राजनीति में बुधवार (3 जून, 2026) का दिन एक दौर की शुरुआत के रूप में देखा जाने वाला है, जब राज्य में नेतृत्व को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के पूरी तरह से थमने के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं.  राजधानी बेंगलुरु में स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं.

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वहीं, कांग्रेस हाईकमान ने भी कर्नाटक में होने जा रहे सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार के साथ पहले चरण में 10 से 12 विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार दूसरे चरण में किए जाने की संभावना है. यह भी कहा जा रहा कि डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण के दौरान कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं, मौजूद रह सकते हैं.

कर्नाटक के नए मंत्रिमंडल के गठन के लिए मंथन जारी

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फिलहाल, कर्नाटक के नए मंत्रिमंडल के गठन को लेकर दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान और राज्य नेताओं के बीच गहनता से मंथन जारी है. इसी कड़ी में कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डीके शिवकुमार, राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार (2 जून, 2026) को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यमंत्री में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ बैठक की. कांग्रेस मुख्यालय में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक की नई कैबिनेट का गठन, सत्ता संतुलन और संगठनात्मक समीकरणों को अंतिम रूप देना था. 

पहले चरण में किन-किन विधायकों के मंत्री बनने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार के साथ पहले चरण में जिन नेताओं के मंत्री बनने की संभावना है, उनमें जी. परमेश्वर, यतींद्र सिद्धारमैया, केजे जॉर्ज, रामलिंगा रेड्डी, प्रियंक खड़गे, एमबी पाटिल, ईश्वर खंड्रे, कृष्णा बायरे गौड़ा, लक्ष्मी हेब्बालकर, बी. सुरेश, सतीश जारकीहोली और जमीर अहमद खान के नाम प्रमुख हैं.

हालांकि, अंतिम सूची पर फैसला कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी के बाद ही होगा. बताया जा रहा है कि अगर सतीश जारकीहोली कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस (KPCC) अध्यक्ष का पद संभालने के लिए सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जा सकता. ऐसी स्थिति में बीके. हरिप्रसाद को मौका मिल सकता है या फिर जारकीहोली को पार्टी संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.

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