कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार (15 सितंबर 2026) को कमजोर मानसून और बारिश की कमी के कारण राज्य में सूखा पड़ने, पीने के पानी की कमी और बिजली संकट की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि सरकार थर्मल पावर जनरेशन बढ़ाने और नेशनल ग्रिड के जरिए अतिरिक्त बिजली हासिल करने के विकल्पों पर विचार कर रही है. मुख्यमंत्री ने अपने गृहनगर कनकपुरा में कहा कि 100 तालुकों में पहले ही सूखा घोषित किया जा चुका है और निर्धारित मानदंडों के आधार पर अन्य क्षेत्रों को भी सूखाग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया जारी है.

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पानी और बिजली के संकट की चेतावनी 

सीएम डीके शिवकुमार ने कहा, ‘इस साल ग्राउंड वाटर लेवल में भारी गिरावट आई है और फसलें बर्बाद हो गई हैं. कई जगहों पर तो फसल की बुवाई भी नहीं हो सकी. आगे की स्थिति संकेत देती है कि पेयजल और बिजली की गंभीर कमी हो सकती है.’ उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते बिजली की मांग 19,000 मेगावाट को पार कर गई थी, जिसके चलते सरकार को शाम के व्यस्त समय में 11 से 13 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ी. सीएम ने कहा, ‘मैंने अपने ऊर्जा मंत्री के जे जॉर्ज से इस बारे में विस्तृत चर्चा करने और पड़ोसी राज्यों से बात करने को कहा है कि क्या कदम उठाए जा सकते हैं.’

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थर्मल पावर जनरेशन बढ़ाने पर विचार

शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में निवेशकों की ओर से पानी, बिजली और जमीन की मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि सरकार थर्मल पावर जनरेशन बढ़ाने और कोयला उत्पादक क्षेत्रों से बिजली हासिल करने पर विचार करेगी. उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड’ व्यवस्था के तहत देश के अन्य हिस्सों में पैदा होने वाली बिजली कर्नाटक तक लाई जा सकती है, हालांकि इसके लिए ट्रांसमिशन चार्ज देना होगा. ‘एक राष्ट्र, एक ग्रिड’ व्यवस्था के तहत भारत के क्षेत्रीय बिजली ग्रिड को एकल राष्ट्रीय ग्रिड में जोड़ा गया है, जो एक समान फ्रीक्वेंसी पर संचालित होता है.

सूखे से किसान बुरी तरह प्रभावित

सीएम शिवकुमार ने सूखे से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि 21 से 23 सितंबर तक प्रस्तावित विधानसभा के विशेष सत्र में किसानों की सूखे से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा के लिए दो दिन निर्धारित किए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘हम सूखे के कारण किसानों के सामने आई समस्याओं पर चर्चा करना चाहते हैं इसलिए किसानों की सूखे से जुड़ी स्थिति पर चर्चा के लिए हमने विशेष रूप से दो दिन रखे हैं. अलग-अलग दलों के विधायकों ने अपनी शिकायतें सामने रखी हैं और सत्र के दौरान उन्हें अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा.'

उन्होंने ने कहा, ‘हम इस मामले में दलगत राजनीति नहीं देखेंगे. जहां भी सूखा गंभीर है और जहां भी निर्धारित मानदंड पूरे होते हैं, हम उन क्षेत्रों को जल्द सूखाग्रस्त घोषित करेंगे.’ मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक 18 सितंबर को तटीय क्षेत्र के दक्षिण कन्नड़ जिले में होगी. उन्होंने कहा कि बैठक में पलायन रोकने और क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल करके लोगों के जीवन में सुधार लाने पर ध्यान दिया जाएगा.