नई दिल्ली: जवाहर लाल युनिवर्सिटी में 46 साल बाद दूसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाएगा. इससे पहले 1971 में जेएनयू में दीक्षांत समारोह हुआ था जिसमें बेहतरीन थीएटर और फिल्म कलाकार बलराज साहनी मुख्य अतिथि थे. जेएनयू, आजादी और लोकतंत्र के संदर्भ में कहे गए बलराज साहनी का भाषण ऐतिहासिक था और आज भी उसकी प्रासंगिकता बरकरार है.
हालांकि इस बार का मुख्य अतिथि कौन होगा, इस पर जेएनयू प्रशासन ने अभी तक कुछ भी नहीं कहा है. दीक्षांत समारोह के आयोजन के लिए उपकुलपति (रेक्टर-2) प्रोफेसर एससी गारकोटी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है. गारकोटी के अलावा इस समिती में 18 अन्य सदस्य भी शामिल हैं. दीक्षांत समारोह के लिए 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2017 के बीच अपनी पीएचडी पूरी करने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट से रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 500 रुपए का भुगतान करना होगा. बलराज साहनी की यादगार बातेंबलराज साहनी ने जेएनयू के पहले दीक्षांत समारोह में कहा था, 'अगर आप मुझे फर्श साफ करने के लिए भी बुलाते तब भी मैं उतना ही खुश और सम्मानित महसूस करता, जितना इस समय यहां खड़े होकर आपको संबोधित करने में महसूस कर रहा हूं.'
साहनी ने कहा, 'आज़ाद आदमी के अंदर कुछ सोचने, फैसला करने और अपने फैसले पर अमल करने की दिलेरी होती है. गुलाम आदमी यह दिलेरी खो चुका होता है. वह हमेशा दूसरे के विचारों को अपनाता है, घिसे-पिटे रास्तों पर चलता है.'
बता दें कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1969 में हुई थी. इसके पहले कुलपति (वाइस चांसलर) जी पार्थसारथी थे. जेएनयू प्रशासन ने कहा कि समारोह के जरिए देश के इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के सभी सकारात्मक पहलुओं को फिर से जीवीत करने की कोशिश है.